Published : Jan 02, 2026, 03:06 PM ISTUpdated : Jan 02, 2026, 03:11 PM IST
VIRAL VIDEO ALERT: न्यू ईयर पार्टी के बाद 2 महिलाओं के नशे में धुत होने के वीडियो ने सोशल मीडिया को झकझोर दिया। बच्चों के सामने लड़खड़ाती मां, फुटपाथ पर गिरी महिला और बिलखते मासूम-क्या यही आज़ादी है? सशक्तिकरण या लापरवाही? सच क्या है, सवाल गहरे हैं।
रोता बच्चा, गिरी मां: दो वीडियो, जो सोशल मीडिया को झकझोर कर रख दिया
New Year Party Viral Video: नए साल की शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। इन वीडियो में महिलाएं अपने ही छोटे बच्चों के सामने शराब के नशे में इस कदर डूबी नजर आती हैं कि वे खुद खड़ी तक नहीं हो पा रहीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन बच्चों को मां की उंगली पकड़कर चलना चाहिए था, वही बच्चे अपनी मां को संभालते दिख रहे हैं।
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क्या यही आज़ादी और सशक्तिकरण है?
भारत तेजी से बदल रहा है। शहरीकरण, आधुनिक जीवनशैली और महिलाओं की बढ़ती स्वतंत्रता ने समाज को नई दिशा दी है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं-चाहे वो करियर हो, शिक्षा हो या सामाजिक जीवन। शराब पीना अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा। पार्टियों और सोशल गेदरिंग्स में महिलाओं का ड्रिंक करना आम हो गया है।
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वायरल वीडियो में क्या दिखा?
पहला वीडियो गुरुग्राम का बताया जा रहा है, जिसमें एक महिला इतनी नशे में है कि वह अपने पैरों पर खड़ी तक नहीं हो पा रही। उसके साथ मौजूद एक पुरुष और एक छोटा बच्चा उसे उठाने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चा बार-बार मां को देखकर घबराया हुआ नजर आता है। दूसरे वीडियो में एक महिला सड़क किनारे नशे में पड़ी है। उसका बच्चा रोते-रोते मां को उठाने की कोशिश करता है, लेकिन मां को कोई होश नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे शब्दों से नहीं, व्यवहार से सीखते हैं। अगर बच्चा अपनी मां को इस हालत में बार-बार देखेगा, तो उसके मन में असुरक्षा, डर और भ्रम पैदा होगा। मां बच्चे की पहली शिक्षक होती है। जब वही संतुलन खो दे, तो बच्चे का मानसिक विकास प्रभावित होना स्वाभाविक है।
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सोशल मीडिया क्यों भड़का?
इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। किसी ने इसे गैर-जिम्मेदाराना हरकत बताया, तो किसी ने कहा “बच्चों को संभालने की उम्र में बच्चा मां को संभाल रहा है।” कई यूजर्स ने इसे महिला सशक्तिकरण के नाम पर जिम्मेदारी से भागना बताया।
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समाज को क्या सोचना चाहिए?
यह घटना किसी एक महिला या वीडियो तक सीमित नहीं है। यह उस सोच का आईना है जहां आज़ादी और जिम्मेदारी के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। नए साल की पार्टी एक रात की खुशी हो सकती है, लेकिन बच्चों के लिए मां-बाप का संतुलित और सुरक्षित होना ज़िंदगी भर की ज़रूरत है। शराब पीना व्यक्तिगत पसंद हो सकती है, लेकिन क्या मां बनने के बाद जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी नहीं? आज बहस महिला बनाम पुरुष की नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी बनाम लापरवाही की है।