
नई दिल्ली. भारत में कोरोना महामारी के बीच बच्चों को वैक्सीन लगाने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा, भारत को 12-17 साल के बच्चों के टीकाकरण के लिए 26 करोड़ खुराक की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, ये कोई छोटा ग्रुप नहीं है। 12-18 साल के लगभग 3-14 करोड़ बच्चे हैं। उनके लिए 26 करोड़ खुराक की जरूरत है। बच्चों के लिए वैक्सीन की टेस्टिंग अभी भी चल रही है।
अगले दो हफ्ते में लाइसेंस मिलने की उम्मीद
वीके पॉल ने कहा, अभी केवल Covaxin ट्रायल कर रहा है, बल्कि Zydus Cadila वैक्सीन भी पहले से ही टेस्टिंग कर रहा है। Zydus को अगले दो हफ्तों में लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। इस बीच डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट बच्चों के लिए वैक्सीन की जांच कर रहे हैं क्योंकि भारत में बच्चों में मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के मामले (एमआईएस-सी) आ रहे हैं। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक एंड इंटेंसिव केयर डेटा के अनुसार, उत्तर भारत में एमआईएस-सी के 100 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
बच्चों का स्कूल खोलना जरूरी है
डॉक्टर धीरेन गुप्ता ने कहा, हमें लगता है कि बच्चे कोविड -19 से कम संक्रमित होते हैं। हालांकि, बच्चों में एमआईएस-सी, पोस्ट-कोरोना होने के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, बच्चों को घरों में रखा गया है। ऐसे में वे बेचैन और उदास हैं। लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को खोलने के बारे में सोचने का समय आ गया है। यह सब तभी संभव है जब हम बच्चों का टीकाकरण करें।
यूरोपीय संघ ने हाल ही में 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन को मंजूरी दी है। अमेरिका और कनाडा ने बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया है। जर्मनी 7 जून से 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों का टीकाकरण शुरू करेगा।
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