
ट्रेंडिंग डेस्क. कहते हैं कि RTI (सूचना का अधिकार) बड़े काम की चीज होती है लेकिन अक्सर इससे जानकारी निकलवाना टेढ़ी खीर माना जाता है। कई बार सरकारी विभाग व अधिकारी जानकारियों को देने में ऐसे पेंतरे अपनाते हैं कि आरटीआई लगाने वाला खुद हारकर पीछे हट जाता है। पर शिवपुरी के इस शख्स ने जो कारनामा किया उसने अधिकारियों को भी हैरानी में डाल दिया। हम बात कर रहे हैं शिवपुरी, बैराड़ के आरटीआई एक्टिविस्ट माखन धाकड़ की, जो अपने नाम की तरह धाकड़ अंदाज में आरटीआई कार्यालय पहुंचे।
बैलगाड़ी और बैंड-बाजा ले जाने की वजह
माखन धाकड़ ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित जानकारी नगर परिषद बैराड़ से मांगी थी पर जानकारी देने से मना कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने ग्वालियर से लेकर भोपाल तक अपील की। कई चक्कर काटने के बाद धाकड़ से कहा गया कि उन्हें पीएम आवास योजना से संबंधित पूरी जानकारी हासिल करने के लिए 25 हजार रुपए जमा कराने होंगे। धाकड़ ने यहां भी हार नहीं मानी और पैसे जमा करा दिए। इसके लिए उन्हें 25 हजार रु का कर्ज भी लेना पड़ा।
9 हजार पन्नों में दी गई जानकारी
धाकड़ ने जब 25 हजार रु जमा करा दिए तब कार्यालय से जवाब आया कि आरटीआई द्वारा मांगी गई जानकारी 9 हजार पन्नों की है। ये जानने के बाद माखन ने मान लिया कि अब उन्हें ये जंग पूरी ही करना है। फिर क्या था तय तारीख और समय पर माखन ढोल-नगाड़े के साथ नगर-परिषद बैराड़ पहुंच गए। लेकिन सबसे ज्यादा मजेदार बात ये थी कि वे यहां बैलगाड़ी भी साथ लाए थे। उन्हें देख कई लोग अचरज में पड़ गए। बाद में पता चला कि आरटीआई के 9 हजार पन्नों को ले जाने के लिए वे यहां बैलगाड़ी लेकर पहुंचे थे।
इस मामले में बैराड़ नगर परिषद के सीएमओ जेएन पारा ने कहा, आरटीआई कार्यकर्ता माखन धाकड़ को फीस जमा कराने के बाद मांगी गई सारी जानकारी दे दी गई है। उनकी जानकारी के लिए यहां से चार कर्मचारियों ने लगातार पांच दिन तक फोटो कॉपी की।
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