
Turkey tourism letter: तुर्की की पर्यटन विभाग की ओर से भारतीय पर्यटकों को संबोधित एक कथित पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हो गया है। इस पत्र में भारतीयों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी तुर्की यात्राएं रद्द या स्थगित न करें क्योंकि भारतीय पर्यटकों के लिए कोई प्रतिबंध या सुरक्षा जोखिम नहीं है।
लेकिन यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर उल्टा असर छोड़ गई। भारतीय यूज़र्स ने तुर्की पर कड़ी नाराज़गी जताई, खासकर उसकी पाकिस्तान के प्रति नरम नीति को लेकर।
सोशल मीडिया यूज़र दर्शित ने इस पत्र को शेयर करते हुए लिखा कि तुर्की, भारतीयों से भीख मांग रहा है कि वापस आओ और ट्रेवेल करो। सोशल मीडिया पर लेटर हजारों बार शेयर किया जा चुका है। तमाम राजनैतिक हस्तियों ने भी लेटर शेयर कर कमेंट किए हैं।
शिवसेना यूबीटी प्रवक्ता व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने शेयर करते हुए लिखा: हम अपने पैसे आतंकवाद समर्थक देश में नहीं खर्च करेंगे। नहीं तुर्की, भारतीय ऐसे देश में पर्यटन पर पैसा खर्च करने नहीं आएंगे जो पाकिस्तान को हथियार देने के लिए उसी का इस्तेमाल करता है। अपने पर्यटकों को कहीं और तलाशें, हमारा पैसा खून का पैसा नहीं है।
प्रियंका चतुर्वेदी की पोस्ट के नीचे टिप्पणी करते हुए एक यूजर ने लिखा: अब पर्यटक पाकिस्तान से भीख का कटोरा लेकर आएंगे। नया चलन।
पत्र साझा करते हुए मार्केट एडवाइजर दर्शन मेहता ने टिप्पणी की: वे पहले से ही दहशत में हैं।
केरल भाजपा अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी पत्र साझा किया और लिखा: नहीं धन्यवाद।
चंद्रशेखर की पोस्ट के नीचे टिप्पणी करते हुए एक यूजर ने लिखा: वे ऐसा कहते हैं जैसे हम किसी डर के कारण तुर्की से बच रहे हैं या जैसे हम खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। मेरे साथी देशवासी आपके देश और आतंकवाद को आपके समर्थन को अस्वीकार कर रहे हैं।
कपिल नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि कोई भी भारतीय यूट्यूबर या प्रभावशाली व्यक्ति जो तुर्की को पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देता हुआ दिखाई देता है, उसे या तो नज़रअंदाज़ कर दिया जाना चाहिए या उसका बहिष्कार किया जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच, भारतीय ट्रैवल कंपनियों EaseMyTrip और Cox & Kings ने तुर्की और अज़रबैजान के लिए सभी टूर पैकेज सस्पेंड करने का निर्णय लिया है। ये दोनों देश हाल ही में भारत-पाक सीमा तनाव के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में दिखे थे। कंपनियों का यह फैसला भारतीय जनता की राष्ट्रीय भावना के साथ खड़ा दिखता है।
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