Gayatri Jayanti 2022: कब है गायत्री जयंती, क्यों मनाया जाता है ये पर्व? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Published : Jun 06, 2022, 12:55 PM IST
Gayatri Jayanti 2022: कब है गायत्री जयंती, क्यों मनाया जाता है ये पर्व? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

सार

धर्म ग्रंथों के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गायत्री जयंती (Gayatri Jayanti 2022) का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 11 जून, शनिवार को है। हालांकि पंचांग भेद के कारण कुछ स्थानों पर ये पर्व 10 जून, शुक्रवार को भी मनाया जाएगा। मान्यता है कि इसी तिथि पर देवी गायत्री प्रकट हुई थीं।

उज्जैन. देवी गायत्री को वेदों की माता कहा जाता है। माता गायत्री को देवी पार्वती, सरस्वती और लक्ष्मी का संयुक्त अवतार भी माना जाता है। इनके एक हाथ में वेद और दूसरे हाथ में कमंडल है। हिंदू धर्म में गायत्री देवी को मंत्र को महामंत्र भी कहा गया है। इस मंत्र के जाप से हर परेशानी दूर हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र के उपायों में भी गायत्री मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। गायत्री जयंती पर देवी की पूजा विशेष रूप से करने का विधान है। जानिए इस दिन के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…

गायत्री जयंती के शुभ मुहूर्त (Gayatri Jayanti 2022 Ke shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 10 जून, शुक्रवार की सुबह 07:25 से होगा, जो अगले दिन 11 जून, शनिवार को सुबह 05:45 तक रहेगी। 11 जून को ही गायत्री जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इस पूरे दिन कभी भी देवी गायत्री की पूजा की जा सकेगी।

इस विधि से करें देवी गायत्री की पूजा (Gayatri Jayanti 2022 Ki Puja Vidhi)
11 जून की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल लेकर गायत्री जयंती के व्रत और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद देवी गायत्री की प्रतिमा या तस्वीर एक साथ स्थान पर स्थापित करें और उनके सामने शुद्ध दी का दीपक जलाएं। इसके बाद देवी गायत्री को फूल माला अर्पित करें और पंचोपचार विधि (कुंकुम, अबीर, गुलाल अन्य चीजों से) से पूजा करें। देवी को भोग लगाएं और उसी स्थान पर बैठकर गायत्री मंत्र का जाप करें। अंत में आरती करें और प्रसाद भक्तों में बांट दें। इस प्रकार देवी गायत्री की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और निगेटिविटी दूर होती है। ये है गायत्री मंत्र…
'ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।। 
अर्थ- उस प्राणस्वरूप, दु:ख नाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरूप परमात्मा को हम अन्तरात्मा में धारण करें। वह ईश्वर हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।

 

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