भारत के साथ ही ये ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी दिखाई देगा।
उज्जैन. इस बार 16-17 जुलाई की दरमियानी रात चंद्रग्रहण का योग बन रहा है। इस दिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा रहेगी। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगने वाला यह ग्रहण धनु राशि में होगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इसके पहले 12 जुलाई, 1870 को यानी 149 साल पहले भी गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था। उस समय भी शनि, केतु और चंद्र के साथ धनु राशि में थे। सूर्य, राहु के साथ मिथुन राशि में था।
भारत सहित इन देशों में देगा दिखाई चंद्र ग्रहण का सूतक 16 जुलाई की दोपहर लगभग 1.30 बजे से शुरू हो जाएगा, जो कि 17 जुलाई की सुबह 4.31 बजे तक रहेगा। रात करीब 1.31 बजे से ग्रहण शुरू हो जाएगा। इसका मोक्ष 17 जुलाई की सुबह करीब 4.31 बजे होगा। पूरे तीन घंटे ग्रहण काल रहेगा। भारत के साथ ही ये ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी दिखाई देगा।
ग्रहण के प्रभाव से आ सकती हैं प्राकृतिक आपदाएं
शनि और केतु ग्रहण के समय चंद्र के साथ धनु राशि में रहेंगे। इससे ग्रहण का प्रभाव और अधिक बढ़ जाएगा।
सूर्य के साथ राहु और शुक्र रहेंगे। सूर्य और चंद्र चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। मंगल नीच का रहेगा।
इन ग्रह योगों की वजह से तनाव बढ़ सकता है। भूकंपन का खतरा रहेगा। बाढ़, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने के योग बन रहे हैं।
ग्रहण के अशुभ फल से बचने के लिए ये करें-
ग्रहण लगने से पहले स्नान करके भगवान का पूजन, यज्ञ, जाप करना चाहिए ।
ग्रहण के दौरान गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवाना के नामों का जाप करें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके श्रद्धा के अनुसार ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
ग्रहण के बाद पुराना पानी, अन्न नष्ट कर नया भोजन पकाया जाता है और ताजा जल भरना चाहिए।
ग्रहणकाल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि के लिए बाद में उसे धो देना चाहिए तथा खुद भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।
ग्रहण के बाद गाय को चारा, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्र दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
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