मंगल प्रदोष 16 नवंबर को, इस विधि से करें व्रत और पूजा, जानिए महत्व और कथा

Published : Nov 15, 2021, 08:29 AM IST
मंगल प्रदोष 16 नवंबर को, इस विधि से करें व्रत और पूजा, जानिए महत्व और कथा

सार

हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत विभिन्न वारों के साथ मिलकर शुभ योग बनाता है। इस बार 16 नवंबर को मंगलवार को होने से मंगल प्रदोष (Mangal Pradosh) का शुभ योग बन रहा है।

उज्जैन. मंगल प्रदोष (Mangal Pradosh) पर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें और शिवजी का ध्यान करके हाथों में पानी और फूल लेकर मंगल प्रदोष व्रत का संकल्प लें। इस दिन बुरे विचार मन में न लाएं। इस दिन में फलाहार करते हुए भगवान शिव का भजन-कीर्तन करें। मंगल प्रदोष में शाम को पूजा करना अनिवार्य है इसके लिए पुन: स्नान आदि करें। अब प्रदोष पूजा मुहूर्त में भगवान शिव की विधि पूर्वक पूजा करें।
 

इस विधि से करें पूजा
- मंगल प्रदोष की सुबह पूजा प्रारम्भ करने से पहले पूजा स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें। फिर पूजा के लिए भगवान शिव की तस्वीर या प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित कर दें।
- अब गंगा जल से भगवान शिव का अभिषेक करें। भांग, धतूरा, सफेद चंदन, फल, फूल, अक्षत (चावल) गाय का दूध, धूप आदि चढ़ाएं। पूजा के दौरान पूजा सामग्री उनको अर्पित करते समय ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।
- शाम को फिर से स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें। भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।
- इसके बाद शिवजी की आरती करें। रात में जागरण करें और शिवजी के मंत्रों का जाप करें। इस तरह व्रत व पूजा करने से व्रती (व्रत करने वाला) की हर इच्छा पूरी हो सकती है।

मंगल प्रदोष की कथा
- एक गांव में गरीब ब्राह्मणी अपने बेटे के साथ रहती थी। वह रोज अपने बेटे के साथ भीख मांगने जाती थी। एक दिन उसे रास्ते में विदर्भ का राजकुमार मिला जो घायल अवस्था में था।
- उस राजकुमार को पड़ोसी राज्य ने आक्रमण कर उसका राज्य हड़प लिया और उसे बीमार बना दिया था। ब्राह्मणी उसे घर ले आई और उसकी सेवा करने लगी।
- सेवा से वह राजकुमार ठीक हो गया और उसकी शादी एक गंधर्व पुत्री से हो गयी। गंधर्व की सहायता से राजकुमार ने अपना राज्य मिल गया।
- इसके बाद राजकुमार ने ब्राह्मण के बेटे को अपना मंत्री बना लिया। इस तरह प्रदोष व्रत के फल से न केवल ब्राह्मणी के दिन सुधर गए बल्कि राजकुमार को भी उसका खोया राज्य वापस मिल गया।  
 

PREV
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi

Recommended Stories

Chandra Grahan 2026: क्या होली पर होगा चंद्र ग्रहण? जानें सच या झूठ
Makar Sankranti 2026 Muhurat: दोपहर बाद शुरू होगा मकर संक्रांति का मुहूर्त, यहां नोट करें टाइम