कुंडली में अशुभ है मंगल तो आज शुभ योग में करें ये आसान उपाय, स्नान-दान से भी दूर हो सकते हैं ग्रहों के दोष

Published : Feb 01, 2022, 09:43 AM IST
कुंडली में अशुभ है मंगल तो आज शुभ योग में करें ये आसान उपाय, स्नान-दान से भी दूर हो सकते हैं ग्रहों के दोष

सार

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगलवार को जब सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में या एक-दूसरे के पास वाली राशि में स्थित होते हैं तो भौमावस्या का योग बनता है। इस बार ये योग माघ मास की मौनी अमावस्या पर 1 फरवरी को बन रहा है। इस दिन मंगल अपनी मित्र राशि में स्थित रहेगा। जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।

उज्जैन. पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, मंगलवार को पड़ने वाली इस अमावस्या पर पितरों की विशेष पूजा की जाए तो परिवार के रोग, शोक और दोष खत्म हो जाते हैं। मंगलवार को अमावस्या होने से इस दिन मंगल दोष से बचने के लिए व्रत और पूजा की जाती है। इस शुभ संयोग में गुड़ या शहद का दान करने से मंगल दोष में कमी आती है। इस योग में हनुमान जी की पूजा करने से भी मंगल दोष कम होता है।

शनिदेव अमावस्या के अधिपति
माघी अमावस्या इस बार इसलिए खास है, चूंकि अमावस्या के अधिपति देवता खुद शनि है। इस दिन दान-पुण्य का कई गुना फल मिलता है। डॉ. मिश्र ने बताया कि अमावस्या के दिन शनि स्वराशि में अधिक बलवान रहेंगे। अमावस्या का दिन हो और शनि मकर राशि में हो तो वृद्ध और रोगियों की सेवा करना शुभ फलदायी रहेगा।

स्नान-दान का विशेष महत्व
भौमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान करने का विशेष महत्व बताया है। इस दिन दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। देव ऋषि व्यास के अनुसार इस तिथि में स्नान और दान करने से हजार गायों के दान का पुण्य फल मिलता है। भौमवती अमावस्या पर हरिद्वार, काशी जैसे तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों पर स्नान करने का विशेष महत्व होता है, लेकिन महामारी या देश-काल और परिस्थितियों के अनुसार इस दिन घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने से भी इसका पुण्य प्राप्त होता है।

मंगल दोष के उपाय
1. भौम अमावस्या के शुभ योग में लाल झंडा किसी मंदिर में दान करें या किसी ब्राह्मण को लाल वस्त्रों का दान करें।
2. मसूर की दाल नदी में प्रवाहित करें या किसी मंदिर में दान करें।
3. मंगल यंत्र की स्थापना अपने घर में करें और रोज इसकी पूजा करें। इससे जल्दी ही शुभ फल मिल सकते हैं।
4. मंगल के मंत्रों का जाप करें। यदि आप स्वयं न कर पाएं तो किसी योग्य ब्राह्मण से करवाएं।
5. हनुमानजी को चोला चढ़ाएं और विधि-विधान से पूजा करें।

 

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