Devuthani Ekadashi 2022 Upay: ये 5 उपाय जगा सकते हैं आपकी किस्मत, 4 नवंबर को कोई 1 करें

Published : Nov 02, 2022, 09:52 AM IST
Devuthani Ekadashi 2022 Upay: ये 5 उपाय जगा सकते हैं आपकी किस्मत, 4 नवंबर को कोई 1 करें

सार

Devuthani Ekadashi 2022: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। एक महीने में 2 एकादशी का योग बनता है। इस तरह साल में कुल 24 एकादशियां होती हैं। इन सभी का नाम और महत्व अलग-अलग होता है। ये तिथि भगवान विष्णु को अति प्रिय है।  

उज्जैन. इस बार 4 नवंबर, शुक्रवार को देवप्रबोधिनी एकादशी (Devuthani Ekadashi 2022) का संयोग बन रहा है। इसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि चार महीने विश्राम करने के बाद भगवान विष्णु इसी तिथि पर नींद से जागते हैं। इसलिए इसे देव ‘प्रबोधिनी’ एकादशी कहते हैं, प्रबोधन का अर्थ है जागना। इस दिन से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपराएं भी हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, देवउठनी एकादशी पर अगर कुछ खास उपाय किए जाएं तो किसी की भी सोई किस्मत जाग सकती है। आगे जानें इन उपायों के बारे में…

भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें
देवउठनी एकादशी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद पहले भगवान विष्णु की पूजा करें। शुद्ध घी का दीपक लगाएं और फिर उसी स्थान पर बैठकर नीचे लिखे मंत्रों में से किसी एक का जाप करें। इन मंत्रों का जाप करने से आपकी हर परेशानी दूर हो सकती है-
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ विष्णवे नम:
- ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

पीले वस्त्र चढ़ाएं, पीले फलों का दान करें
देवउठनी एकादशी पर भगवान जो व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें और पीले फल जैसे केले आदि का भोग लगाएं। बाद में इन फलों का दान जरूरतमंदों को कर दें। इससे गुरु ग्रह से संबंधित शुभ फल भी आपको प्राप्त होंगे।

तुलसी को सुहाग की सामग्री भेंट करें
देवउठनी एकादशी पर तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन शालिग्राम शिला और तुलसी का विवाह विशेष रूप से करवाया जाता है। इस दिन शाम को तुलसी के पौधे के सामने शुद्ध घी का दीपक लगाकर पूजा करें और बाद में सुहाग की सामग्री जैसे चुनरी, चूड़ी, बिछिया, मेहंदी, कुंकुम आदि अर्पित करें। इससे आपके वैवाहिक जीवन में भी खुशियां बनी रहेंगी।

पीपल की पूजा करें
धर्म ग्रंथों में पीपल को भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना गया है। देवउठनी एकादशी पर पीपल के नीचे दीपक जलाएं और इसकी 7 परिक्रमा करें। इसके बाद ये मंत्र बोलें- 
आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यंसर्वसम्पदम्।
देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।

इस उपाय से आपको धन-धान्या और सौभाग्य में वृद्धि होगी।

जरुरतमंदों को दान करें
एकादशी तिथि पर दान करने से सौ गुना पुण्य मिलता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है। देवउठनी एकादशी पर जरूरतमंदों को कपड़े, भोजन, कच्चा अनाज, कंबल, जूते-चप्पल आदि का दान करें। अगर ऐसा करना संभव न हो तो किसी मंदिर के अन्नक्षेत्र में इच्छा अनुसार पैसों का दान कर दें।



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