Saphala Ekadashi 2022: 19 दिसंबर को सफला एकादशी पर करें ये उपाय, धन लाभ के साथ होंगे दूसरे फायदे भी

Published : Dec 18, 2022, 11:22 AM IST
Saphala Ekadashi 2022: 19 दिसंबर को सफला एकादशी पर करें ये उपाय, धन लाभ के साथ होंगे दूसरे फायदे भी

सार

Saphala Ekadashi 2022: साल 2022 की अंतिम एकादशी 19 दिसंबर, सोमवार को है। इस दिन एक नहीं कई शुभ योग बन रहे हैं, जिसके चलते इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ गया है। इस एकादशी का नाम सफला एकादशी है। इस दिन व्रत करने से हर काम में सफलता मिलती है।  

उज्जैन. धर्म ग्रंथों के अनुसार, पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी (Saphala Ekadashi 2022) कहते हैं। इस बार ये तिथि 19 दिसंबर, सोमवार को है। इस एकादशी का महत्व कई पुराणों में बताया गया है। महाभारत में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी का महत्व बताया गया है। उज्जैन के ज्योयिताषार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, इस दिन छत्र और सुकर्मा नाम के 2 शुभ योग भी बन रहे हैं। इस दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो हर परेशानी से बचा जा सकता है। आगे जानिए इन उपायों के बारे में…

धन लाभ के लिए ये उपाय करें
जो लोग धन की इच्छा रखते हैं उन्हें सफला एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। पूजा में पहले देवी लक्ष्मी और विष्णु जी का अभिषेक गाय के दूध से करें। दूध में केसर मिला हो तो और भी शुभ रहता है। पूजा के बाद भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं। 

शीघ्र विवाह के लिए ये उपाय करें
जिन लोगों की विवाह में परेशानी आ रही है वे लोग सफलता एकादशी पर भगवान शालिग्राम और तुलसी के पौधे की पूजा एक साथ करें। शालिग्राम शिला भगवान विष्णु का प्रतीक है और तुलसी देवी लक्ष्मी का। एकादशी पर इनकी पूजा करने से विवाह से संबंधित परेशानी दूर होती है और शीघ्र विवाह के योग भी बनते हैं।

सुख-समृद्धि के लिए ये उपाय करें
परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसके लिए सफला एकादशी पर किसी विष्णु मंदिर में अपनी इच्छा अनुसार, फल, अनाज, कपड़े, बर्तन आदि चीजें चढ़ाएं और बाद में इन्हें जरूरतमंद लोगों को बांट दें। इस उपाय से आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। 

वैवाहिक सुख के लिए ये उपाय करें
अगर पति-पत्नी में अक्सर विवाद होते रहते हैं तो सफला एकादशी पर केले के पेड़ की पूजा करें। हल्दी मिश्रित जल चढ़ाएं और 7 बार परिक्रमा करने के बाद आसान पर बैठकर नीचे लिखे मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें- 
ॐ बृं बृहस्पतये नमः


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Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे। 

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