शनि और राहु-केतु हैं संक्रामक रोगों के कारक, इनके अशुभ फल से बचने के लिए ये उपाय करें

Published : May 03, 2021, 11:35 AM IST
शनि और राहु-केतु हैं संक्रामक रोगों के कारक, इनके अशुभ फल से बचने के लिए ये उपाय करें

सार

ज्योतिष शास्त्र में रोगों के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया गया है। जैसे किस ग्रह की कारण कौन-से रोग होने की संभावना सर्वाधिक होती है।

उज्जैन. विषाणु जनित रोगों के लिए राहु-केतु व शनि जैसे ग्रह जिम्मेदार माने जाते हैं, क्योंकि यह वायु तत्व ग्रह है जो की संक्रमण को फैलाने का काम करते है। ये ग्रह जब अन्य ग्रहों के साथ मिलकर अशुभ योग बनाते हैं तो कोरोना जैसी महामारी फैलती है। इसका असर उन लोगों पर अधिक होता है, जिनकी कुंडली में ये ग्रह प्रतिकूल स्थान पर बैठे हों। आगे जानिए इन ग्रहों की शांति के लिए कौन-से उपाय करने चाहिए…

1. शनि, राहु और केतु से संबंधित मंत्रों का जाप करें। अगर स्वयं ऐसा न कर पाएं तो किसी ब्राह्मण से भी ये कार्य करवा सकते हैं।  
 

2. रोज आगे बताए गए मंत्र का यथाशक्ति जाप करें। ये मंत्र दुर्गासप्तशती से लिया गया है जो रोगों को नाश करता है-
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिताह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥
 

3. संक्रामक रोगों से बचाव के लिए नवग्रह हवन करवाना उत्तम उपाय है। ऐसे करने से सभी ग्रहों से संबंधित शुभ फल हमें मिलने लगते हैं।
 

4. शनि, राहु और केतु से संबंधित चीजों जैसे- जूते, कंबल, काले तिल, सात प्रकार का अनाज, बकरी आदि का दान करना चाहिए।
 

5. इन ग्रहों से संबंधित पशु-पक्षियों जैसे काला कुत्ता, भैंस, नाग और पक्षियों के भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए।
 

6. शनि के अशुभ फल से बचने के लिए प्रत्येक शनिवार को व्रत करें और छाया दान (तेल में अपना मुख देखकर दान करना) करें।
 

7. राहु की अशुभ दशा से बचने के लिये बुधवार को जौ, सरसों, सिक्का, सात प्रकार के अनाज, नीले या भूरें रंग के कपड़े और कांच की वस्तुओं का दान करें।
 

8. कुत्ते को रोजाना दूध पिलाना या घर पर काले कुत्ते को पालना केतु को शांत करने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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