Shani Pushya 2022: 4 जून को बन रहा है शनि-पुष्य का शुभ योग, ये 5 उपाय करने से प्रसन्न होंगे शनिदेव

Published : Jun 03, 2022, 11:45 AM IST
Shani Pushya 2022: 4 जून को बन रहा है शनि-पुष्य का शुभ योग, ये 5 उपाय करने से प्रसन्न होंगे शनिदेव

सार

ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं। इनमें से पुष्य को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी चीज लंबे समय तक उपयोग में बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि भी लाती है।

उज्जैन. पुष्य नक्षत्र में की गई पूजा और उपाय भी शुभ फल प्रदान करते हैं। अलग-अलग दिनों के साथ मिलकर ये नक्षत्र कई शुभ योग बनाता है। इस बार 4 जून, शनिवार को पुष्य नक्षत्र होने शनि-पुष्य (Shani Pushya 2022) का शुभ योग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, पुष्य नक्षत्र 3 जून की शाम 7 बजे से शुरू होगा जो अगले दिन यानी 4 जून की रात लगभग 10 बजे तक रहेगा। जो लोग शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, उनके लिए ये अच्छा मौका है। इस दिन शनिदेव के कुछ आसान उपाय करने से आप परेशानियों से बच सकते हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं… 

1. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए हनुमानजी की पूजा भी विशेष फलदाई बताई गई है। शनिवार को  हनुमान चालीसा या हनुमान बाहु अष्टक का पाठ करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। ये उपाय हनुमानजी के मंदिर में बैठकर किया जाए तो और भी जल्दी शुभ फल मिलते हैं।
2. शनि पुष्य के शुभ योग में काले काले घोड़े की नाल से अंगूठी बनावाकर अपनी मध्यमा उंगली (सबसे बड़ी) में धारण करें। ऐसा करना संभव न हो तो किसी ज्योतिषी से सलाह लेकर शनि का रत्न नीलम भी पहन सकते हैं।
3. शनि पुष्य के शुभ योग में शनिदेव की पूजा करने के बाद उसी स्थान पर बैठकर शनि मंत्रों का जाप करें। ये हैं शनिदेव के कुछ आसान मंत्र-
- ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः 
- ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये
- ऊँ शं शनैश्चाराय नमः
- ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।
4. शनिदेव का तिल के तेल से अभिषेक करें या पंडित से करवाएं। इसके बाद शनि शांति मंत्रों से हवन करवाएं। ये सब करने के बाद गरीबों, दिव्यांगों और अनाथों को भोजन करवाएं। कुष्ठ रोगियों को जूते-चप्पल, कंबल, तेल आदि का दान करें।
5. ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र का पाठ करते हुए पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के पेड़ में मीठा दूध अर्पित करें और उसके नीचे बैठकर शनि स्तवराज का पाठ करें।

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