
नई दिल्ली: डर के आगे जीत होती है और ये जीत हिम्मत ना हारने से मिलती है। कई लोग छोटी सी परेशानी से डरकर हताश हो जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जिनकी जिंदगी में ऐसे कई पड़ाव आते हैं, जो उन्हें तोड़ देते हैं। लेकिन वो डटकर इन परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसी ही एक मिसाल हैं भारत के बॉडीबिल्डर आनंद अर्नाल्ड।
कैंसर और लकवे के हुए शिकार
आनंद का जन्म जिस परिवार में हुआ, वहां कई फैमिली मेंबर्स खिलाड़ी थे। उन्होंने भी कम उम्र से ही बॉडीबिल्डिंग शुरू कर दी थी। मात्र 13 साल में उन्होंने बॉडीबिल्डिंग शुरू कर दी थी। लेकिन इसके दो साल बाद ही यानी जब वो 15 साल के हुए, उनपर मुसीबतों का पहाड़ गिर गया। पहले उन्हें कैंसर ने अपनी चपेट में ले लिया। कैंसर ने उन्हें कमजोर कर दिया। अभी कैंसर से जंग जारी ही थी कि अचानक उन्हें पेट के नीचे के हिस्से में लकवा मार गया।
तीन साल बिस्तर पर बिताए
लकवा मार देने के कारण आनंद तीन साल तक बिस्तर से उठ नहीं पाए थे। इस दौरान आनंद टूट गए थे। उनकी मां ने उनका बच्चे की तरह ध्यान रखा। आनंद के मुताबिक, उस समय वो अपना कोई काम तक नहीं कर पाते थे। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने खुद को दुबारा से मजबूत किया। परिवार के सपोर्ट के बाद उन्होंने दुबारा बॉडीबिल्डिंग शुरू की।
आज हैं इतने कामयाब
एक साथ दो जानलेवा बीमारी का शिकार हुए आनंद आज 27 खिताब अपने नाम कर चुके हैं। वो 3 बार मिस्टर इंडिया और 12 बार मिस्टर पंजाब रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कई बॉडीबिल्डिंग खिताब भी अपने नाम किया है। लोगों के लिए आनंद एक मिसाल हैं, जिन्होंने हार मानने की जगह मुसीबतों को फेस किया और आज कामयाबी की राह पर हैं।
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