
नई दिल्ली। दुनिया के अलगःअलग देशों में खाने-पीने के अलग-अलग तरीके प्रचलित हैं। वहीं, देहातों में खाने का कुछ अलग तरीका होता है तो शहरों और बड़े होटलों में अलग ही। कहीं लोग छुरी-कांटे से खाना सभ्य होने की निशानी मानते हैं तो कहीं खाना हाथ से ही खाया जाता है। कहीं प्लेट या थाली के बजाय पत्ते में खाना परोसा जाता है। कहीं खाना थाली में छोड़ना बुरा माना जाता है तो कहीं शिष्टाचार के नाते कुछ न कुछ खाना प्लेट में छोड़ना जरूरी समझा जाता है। जानते हैं दुनिया के कुछ प्रमुख देशों में क्या हैं खाने-पीने के तरीके।
थाईलैंड
इस देश में फॉर्क से सीधा खाना खाना असभ्यता की निशानी माना जात है। यहां पहले फॉर्क से खाना चम्मच में लिया जाता है और फिर खाया जाता है।
जापान
कुछ जगहों पर खाना खाते हुए मुंह से आवाज निकालना बुरा माना जाता है। अगर कुछ पी रहे हों तो भी किसी तरह की आवाज मुंह से नहीं निकलनी चाहिए। लेकिन जापान में ऐसा नहीं है। वहां सूप या चाय पीने के साथ लोग आवाज निकालते हैं और नूडल्स खाने के सात भी। इसे बुरा नहीं माना जाता।
मिडल-ईस्ट
मिडल-ईस्ट के देशों और भारत में बाएं हाथ से खाना बहुत बुरा माना जाता है। जिन लोगों की आदत बाएं हाथ से काम करने की होती है, वे बाएं हाथ से खाते भी हैं। इसे अच्छा नहीं समझा जाता। खाना हमेशा दाएं हाथ से खाना सही माना जाता है।
साउथ कोरिया
साउथ कोरिया में यह परंपरा है कि खाना खाने की शुरुआत सबसे पहले परिवार का सबसे बुजुर्ग व्यक्ति करता है। उसके बाद ही दूसरे लोग खाना शुरू करते हैं। दूसरी तरफ, जब तक सबसे बुजुर्ग व्यक्ति खाना खत्म नहीं करता, कोई खाने की टेबल से उठ नहीं सकता।
चीन
चीन में खाने की टेबल पर चॉपिस्टिक उठा कर बात करना असभ्यता की निशानी माना जाता है। चॉपिस्टिक से किसी की तरफ इशारा करना भी गलत माना जाता है। चीन में खाना खाते हुए अगर आपने प्लेट पूरा साफ कर दिया तो यह भी ठीक नहीं समझा जाता। इसीलिए लोग वहां खाते समय प्लेट में थोड़ी भी जूठन छोड़ देते हैं। चीन में खाने के बाद डकार लेने का मतलब है कि खाना आपको पसंद आया और आपने भर पेट खाना खाया, जबकि कुछ देशों में खाने के तुरंत बाद डकार लेना बुरा माना जाता है।
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