
लंदन। पूरी दुनिया में कमोबेश औरतों को असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा खतरा तो उनकी आबरू पर होता है। बचपन से लेकर जवानी और उम्रदराज हो जाने पर भी उन्हें लोगों की गंदी निगाहों का सामना करना पड़ता है। कई बार उनका यौन शोषण होता है तो कई बार उन्हें बलात्कार का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति सिर्फ पिछड़े देशों में ही नहीं है। अमेरिका और यूरोप के विकसित देशों में भी लड़कियों को यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है। इससे बचाव के लिए लड़कियां कई उपाय अपनाती हैं। लेकिन कुछ देशों में उन्हें यौन शोषण से बचाने के लिए अजीबोगरीब प्रथा चल पड़ी है, जिसे भयानक कह सकते हैं। पहले ऐसी प्रथा अफ्रीका के पिछड़े देशों में ही थी, पर अब ब्रिटेन जैसे विकसित देश में भी आदम जमाने की प्रथा चल पड़ी है, जिसमें लड़कियों को बहुत दर्द झेलना पड़ता है और वे बदसूरत भी हो जाती हैं।
क्या है ये प्रथा
इस प्रथा के तहत लड़कियों की छाती को गर्म पत्थर से दबाया जाता है, ताकि उनके स्तनों का उभार न हो सके और वे आकर्षक न लगें। इसे ब्रेस्ट आयरनिंग कहते हैं। पहले यह प्रथा कुछ अफ्रीकी देशों में ही प्रचलित थी। वहां गर्म खौलते पत्थर को लड़कियों की छाती पर दबा दिया जाता था। इससे उनकी चमड़ी जल जाती थी और स्तनों के टिश्यू खत्म हो जाते थे। फिर उनके स्तनों का उभार नहीं हो पाता था और छाती सपाट रहती थी। लड़कियों की मां और उनके अभिभवाकों का मानना था कि ऐसा कर देने से किसी की गंदी निगाह उन पर नहीं पड़ेगी और लड़की बलात्कार से बच जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा बलात्कार और यौन हिंसा की घटनाएं होती हैं।
विकसित देशों में भी होने लगी 'ब्रेस्ट आयरनिंग'
बहरहाल, ब्रेस्ट आयरनिंग की ये प्रथा अब ब्रिटेन जैसे विकसित देश में भी चल पड़ी है। ब्रिटेन के कई हिस्सों में यह प्रथा जोर-शोर से चल पड़ी है। दक्षिण लंदन के एक उपनगर क्रोय्डॉन में हाल ही में ब्रेस्ट आयरनिंग के 15-20 मामले सामने आए हैं। जब एक अखबार में इसके बारे में खबर प्रकाशित हुई तो इसका विरोध भी शुरू हो गया है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रथा बहुत ही खतरनाक है और शोषण से बचाने का जरिया क्या, अपने आप में ही बहुत बड़ा शोषण और अत्याचर है। डॉक्टरों का कहना है कि इससे लड़कियों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर होता है। ब्रेस्ट आयरनिंग से उन्हें इन्फेक्शन और आगे चल कर ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना भी रहती है। उन्हें बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग कराने में भी दिक्कत होती है। साथ ही, मानसिक यंत्रणा का सामना भी करना पड़ता है।
यूनाइटेड नेशंस ने जतायी चिंता
इस तरह के मामले सामने आने के बाद यूनाइटेड नेशंस ने भी इस पर चिंता जताते हुए इसे बहुत ही क्रूर प्रथा बताया है और इस पर रोक लगाने की बात कही है। यूनाइटेड नेशंस का कहना है कि ऐसा दुनिया में कई जगहों पर हो रहा है, पर मामले सामने नहीं आते।
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