30 दिसंबर 1966 को रिलीज हुई फिल्म 'आखिरी ख़त' की रिलीज को 58 साल हो गए है। यह ऐसी फिल्म है, जिसकी कहानी आपको झकझोर कर रख देगी।
'आखिरी ख़त' से राजेश खन्ना ने बतौर लीड हीरो अपने करियर की शुरुआत की थी। आगे चलकर राजेश खन्ना बॉलीवुड ही नहीं, भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार के रूप में फेमस हुए।
गोविंद (राजेश खन्ना) को कुल्लू में छुट्टियों के दौरान लाजो (इंद्राणी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है। दोनों गुपचुप मंदिर में शादी करते हैं और गोविंद आगे की पढ़ाई को शहर चला जाता है।
लाजो की प्रेग्नेंसी का पता चलता है, जिसके बाद उसे उसकी सौतेली मां 500 रु. में बेच देती है और उसे प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। बाद में लाजो एक बेटे बंटू को जन्म देती है।
लाजो अपने पति गोविंद को ढूंढने मुंबई जाती है। लेकिन एक दिन वहां उसकी मौत हो जाती है। बंटू का आगे क्या होता है, कैसे वह अपने पिता तक पहुंच पाता है? यह आपका दिल दहला देगा।
'आखिरी ख़त' भारत की ओर से बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म की कैटेगरी में ऑस्कर के लिए भेजी गई थी। लेकिन इसे नॉमिनेशन नहीं मिल पाया था।
चेतन आनंद निर्देशित 'आखिरी ख़त' के तीन रीमेक बन चुके हैं। तमिल में यह Poonthalir (1979), तेलुगु में Chinnari Chitti Babu (1981) और तुर्किश में Garip Kuş (1974) नाम से बनी।