उत्तर प्रदेश में बिजली की नई दरों को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है. 20 मई की बैठक में अहम फैसला लिया जा सकता है.
राजनीतिक और तकनीकी कारणों को देखते हुए माना जा रहा है कि यूपी में लगातार सातवें साल बिजली दरों में बदलाव नहीं होगा.
मार्च और अप्रैल में हुई जनसुनवाई के दौरान बिजली कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों की दलीलें नियामक आयोग के सामने रखी गईं.
कंपनियों का दावा है कि बिजली आपूर्ति खर्च और राजस्व वसूली में बड़ा अंतर है. इसी वजह से दरें बढ़ाने की मांग की गई है.
अगर नियामक आयोग कंपनियों की मांग मान लेता है तो यूपी में बिजली की दरों में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का सरप्लस निकलता है.
कॉर्पोरेशन स्मार्ट मीटर पर हुए खर्च को नई दरों में जोड़ना चाहता है, जबकि उपभोक्ता संगठन इसका लगातार विरोध कर रहे हैं.
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