पिछले दो साल से कोरोना के चलते विवाह आयोजनों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे, जो इस बार नहीं है। जिसके चलते इस साल शादियों की धूम मची हुई है। 

उज्जैन. हिंदू धर्म में विवाह से जुड़े कई नियम और पंरपराएं भी हैं। इनके पीछे कोई न कोई धार्मिक, वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तथ्य जरूर छिपे हैं। ऐसी ही एक परंपरा है शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने की। ये परंपरा सदियों से चली आ रही है और वर्तमान में ये काफी ग्लेमरस भी होती जा रही है। शादी के 2 से 3 दिन पहले ये दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने की रस्म शुरू होती है, जो घोड़ी पर बैठने से पहले तक निभाई जाती है। आज हम आपको इस परंपरा में छिपे तथ्यों के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है…

ज्योतिष में हल्दी को माना गया है खास
ज्योतिष शास्त्र में हल्दी को गुरु से जोड़कर देखा जाता है और बिना गुरु की शुभता के विवाह संपन्न नहीं होते यानी विवाह के लिए गुरु ग्रह का अनुकूल होना बहुत जरूरी है। जब दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है और पर गुरु ग्रह का शुभ प्रभाव पड़ता है। वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए गुरु ग्रह का शुभ होना बहुत जरूरी है। दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने के पीछे एक तथ्य ये भी है।

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ये है हल्दी लगाने का वैज्ञानिक कारण
आयुर्वेद के अनुसार, हल्दी में एंटीबायोटिक और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। जब दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है तो इन गुणों के चलते इनमें स्किन से संबंधित परेशानियां दूर हो जाती हैं और त्वचा पर किसी तरह का कोई इंफेक्शन भी नहीं होता। हल्दी की वजह से दूल्हा-दुल्हन का रूप भी निखर आता है। दूल्हा-दुल्हन पर जब हल्दी का रंग चढ़ता है तो उनकी खूबसूरती देखने ही बनती है। ये भी एक कारण है वर-वधू को हल्दी लगाने का।

भगवान विष्णु को भी प्रिय है हल्दी
धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु को पीतांबरधारी कहते हैं यानी भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पसंद है। इसलिए उन्हें पीले रंग की चीजें भी चढ़ाई जाती हैं जैसे पीले फल, पीली मिठाई आदि। भगवान विष्णु के अभिषेक में भी हल्दी और केसर का उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार जब दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है तो ये समझा जाता है कि इन्हें भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है।

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