अनंत चतुर्दशी 1 सितंबर को, इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा, लगाएं खीर का भोग

Published : Aug 31, 2020, 12:14 PM IST
अनंत चतुर्दशी 1 सितंबर को, इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा, लगाएं खीर का भोग

सार

भाद्रमास मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाई जाती है। इस बार अनंत चतुर्दशी का पर्व 1 सितंबर, मंगलवार को है। इस दिन भगवान अनंत (विष्णु) की पूजा की जाती है।

उज्जैन. इस दिन भगवान अनंत (विष्णु) की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं सौभाग्य की रक्षा एवं सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

इस विधि से करें अनंत चतुर्दशी का व्रत
- इस दिन व्रती महिला (व्रत करने वाली महिला) को सुबह व्रत के लिए संकल्प लेना चाहिए व भगवान विष्णु की पूजा करना चाहिए। भगवान विष्णु के सामने 14 ग्रंथियुक्त अनन्त सूत्र (14 गांठ युक्त धागा) को रखकर भगवान विष्णु के साथ ही उसकी भी पूजा करनी चाहिए।
- पूजा में रोली, मोली, चंदन, फूल, अगरबत्ती, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग) आदि का प्रयोग करना चाहिए और प्रत्येक को समर्पित करते समय ऊँ अनन्ताय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। पूजा के बाद यह प्रार्थना करें-
नमस्ते देवदेवेशे नमस्ते धरणीधर। नमस्ते सर्वनागेंद्र नमस्ते पुरुषोत्तम।।
न्यूनातिरिक्तानि परिस्फुटानि। यानीह कर्माणि मया कृतानि।।
सर्वाणि चैतानि मम क्षमस्व। प्रयाहि तुष्ट: पुनरागमाय।।
दाता च विष्णुर्भगवाननन्त:। प्रतिग्रहीता च स एव विष्णु:।।
तस्मात्तवया सर्वमिदं ततं च। प्रसीद देवेश वरान् ददस्व।।

- प्रार्थना के बाद कथा सुनें तथा रक्षासूत्र पुरुष दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांध लें। रक्षासूत्र बांधते समय इस मंत्र का जाप करें-

अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव।
अनन्तरूपे विनियोजितात्मामाह्यनन्तरूपाय नमोनमस्ते।।

- इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराकर व दान देने के बाद स्वयं भोजन करें। इस दिन नमक रहित भोजन करना चाहिए।

ये है अनंत व्रत की कथा...
- प्राचीन काल में सुमन्तु नामक ऋषि थे। उनकी एक पुत्री थी, जिसका नाम शीला था। शीला अत्यंत गुणवती थी। समय आने पर सुमन्तु ऋषि ने उसका विवाह कौण्डिन्यमुनि से कर दिया।
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को शीला ने अनंत चतुर्दशी का व्रत किया और भगवान अनन्त का पूजन करने के बाद अनंतसूत्र अपने बाएं हाथ पर बांध लिया। भगवान अनंत की कृपा से शीला के घर में सुख-समृद्धि आ गई और उसका जीवन सुखमय बन गया।
- एक बार क्रोध में आकर कौण्डिन्यमुनि ने शीला के हाथ में बंधा अनंतसूत्र तोड़कर आग में डाल दिया। इसके कारण उनका सुख-चैन, ऐश्वर्य-समृद्धि, धन-संपत्ति आदि सभी नष्ट हो गए और वे बहुत दु:खी रहने लगे।
- एक दिन अत्यंत दु:खी होकर वे भगवान अनंत की खोज में निकल पड़े। तब भगवान ने उन्हें एक वृद्ध ब्राह्मण के रूप में दर्शन दिए और उनसे अनंत व्रत करने को कहा।
- कौण्डिन्यमुनि ने विधि-विधान पूर्वक अपनी पत्नी शीला के साथ श्रृद्धा व विश्वास से अनंत नारायण की पूजा की और व्रत किया। अनंत व्रत के प्रभाव से उनके अच्छे दिन पुन: आ गए और उनका जीवन सुखमय हो गया।

उपाय
अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं। इसमें तुलसी के पत्ते जरूर डालें। व्रत न कर पाएं तो इस उपाय से भी भगवान की कृपा आप पर बनी रहेगी और आपकी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
 

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