यमराज के इस वरदान की वजह से मनाया जाता है भाई दूज का पर्व

Published : Nov 16, 2020, 10:26 AM IST
यमराज के इस वरदान की वजह से मनाया जाता है भाई दूज का पर्व

सार

इस बार 16 नवंबर, सोमवार को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को भोजन करने घर पर बुलाती हैं और तिलक करने के बाद उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस पर्व से जुड़ी एक कथा भी है, जो इस प्रकार है...  

उज्जैन. इस बार 16 नवंबर, सोमवार को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को भोजन करने घर पर बुलाती हैं और तिलक करने के बाद उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस पर्व से जुड़ी एक कथा भी है, जो इस प्रकार है...

ये है भाई दूज से जुड़ी कथा...
- सूर्य की पत्नी संज्ञा की दो संतानें थीं। संज्ञा के पुत्र का नाम यमराज और पुत्री का नाम यमुना था। संज्ञा अपने पति सूर्य की तेज किरणों को सहन नहीं कर सकने के कारण उत्तरी ध्रुव में छाया बनकर रहने लगी।
- इसी से ताप्ती नदी तथा शनिश्चर का जन्म हुआ। इसी छाया से सदा युवा रहने वाले अश्विनी कुमारों का भी जन्म हुआ, जो देवताओं के वैद्य माने जाते हैं। उत्तरी ध्रुव में बसने के बाद संज्ञा (छाया) का यम तथा यमुना के साथ व्यवहार में अंतर आ गया।
- इससे व्यथित होकर यम ने अपनी नगरी यमपुरी बसाई। यमुना अपने भाई यम को यमपुरी में पापियों को दंड देते देख दु:खी होती, इसलिए वह गोलोक चली गई। समय व्यतीत होता रहा। तब काफी सालों के बाद अचानक एक दिन यम को अपनी बहन यमुना की याद आई।
- यम ने अपने दूतों को यमुना का पता लगाने के लिए भेजा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। फिर यम स्वयं गोलोक गए, जहां यमुनाजी की उनसे भेंट हुई। इतने दिनों बाद यमुना अपने भाई से मिलकर बहुत प्रसन्न हुई। यमुना ने भाई का स्वागत किया और स्वादिष्ट भोजन करवाया।
- इससे भाई यम ने प्रसन्न होकर बहन से वरदान मांगने के लिए कहा। तब यमुना ने वर मांगा - 'हे भैया, मैं चाहती हूं कि जो भी मेरे जल में स्नान करे, वह यमपुरी नहीं जाए।' यह सुनकर यम चिंतित हो उठे और मन-ही-मन विचार करने लगे कि ऐसे वरदान से तो यमपुरी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
- भाई को चिंतित देख, बहन बोली- भैया आप चिंता न करें, मुझे यह वरदान दें कि जो लोग आज के दिन बहन के यहां भोजन करें तथा मथुरा नगरी स्थित विश्रामघाट पर स्नान करें, वे यमपुरी नहीं जाएं। यमराज ने इसे स्वीकार कर वरदान दे दिया। बहन-भाई के मिलन के इस पर्व को अब भाई-दूज के रूप में मनाया जाता है।

भाई दूज के बारे में ये भी पढ़ें

भाई दूज 16 नवंबर को, इस दिन बहन के घर खाना खाने से बढ़ती है भाई की उम्र

मान्यता: मृत्यु के बाद यमराज के इस मंदिर में सबसे पहले आती है आत्मा

यमराज के सहायक हैं चित्रगुप्त, भाई दूज पर होती है इनकी भी पूजा, ये हैं इनके 3 प्रमुख मंदिर

चित्रगुप्त रखते हैं मनुष्यों के हर अच्छे-बुरे कामों का हिसाब, भाई दूज पर की जाती है इनकी भी पूजा

 

PREV
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi

Recommended Stories

Chandra Grahan 2026: क्या होली पर होगा चंद्र ग्रहण? जानें सच या झूठ
Makar Sankranti 2026 Muhurat: दोपहर बाद शुरू होगा मकर संक्रांति का मुहूर्त, यहां नोट करें टाइम