Friendship day 2022: हजारों सालों से ये जगह बनी हुई है सच्ची दोस्ती की मिसाल

Published : Aug 07, 2022, 07:50 AM IST
Friendship day 2022: हजारों सालों से ये जगह बनी हुई है सच्ची दोस्ती की मिसाल

सार

दोस्ती एक बहुत ही खास रिश्ता होता है। क्योंकि इसे भगवान नहीं बनाता, सिर्फ यही एकमात्र ऐसा रिश्ता है, जिसे हम खुद चुनते हैं। इसी रिश्ते को सेलिब्रेट करने के लिए हर साल अगस्त माह के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे (Friendship day 2022) मनाया जाता है।

उज्जैन. इस बार फ्रेंडशिप डे 7 अगस्त (Friendship day 2022 on 7 August) को है। वैसे तो दुनिया में दोस्ती की कई मिसालें हैं, लेकिन इनमें एक जगह ऐसी भी है जो हजारों सालों से सच्ची दोस्ती की गवाही दे रही है। ये स्थान है मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में स्थित नारायणा गांव (narayana village)। इस जगह का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा से है। हजारों सालों से ये स्थान भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती का प्रमाण अपने अंदर समेटे हुए हैं। फ्रेंडशिप डे के मौके पर जानिए क्यों खास है उज्जैन का नारायणा गांव…    

क्यों खास है नारायण गांव?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण जब शिक्षा प्राप्त करने उज्जैन स्थित गुरु सांदीपनि के आश्रम में आए तो यहां उनकी मित्रता सुदामा से हुई। सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे। ग्रंथों के अनुसार, एक बाद गुरु माता ने श्रीकृष्ण और सुदामा को आश्रम के लिए लकड़ियां लाने जंगल में भेजा, तभी तेज बारिश शुरु हो गई और रात होने के वजह से उन्हें एक स्थान पर रुकना पड़ा। मान्यता है कि नारायणा ही वही स्थान पर जहां श्रीकृष्ण और सुदामा ने रात्रि विश्राम किया था। 



अब यहां है दोस्ती का मंदिर
स्थानीय लोगों ने इस स्थान के धार्मिक महत्व को समझते हुए एक मंदिर का निर्माण करवाया है। इसे कृष्ण-सुदामा धाम के नाम से जाना जाता है। लोग इसे मित्रता का मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर में रखे लकड़ी के गट्ठरों के बारे में कहा जाता है कि ये वही लकड़ियां हैं जो श्रीकृष्ण और सुदामा ने एकत्रित की थी, लेकिन बारिश की वजह से ले जा नहीं पाए थे।

ऐसा है मंदिर का स्वरूप
श्रीकृष्ण सुदामा मंदिर उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के करीब 9 किमी दूर स्थित है। कहा जाता है कि ये भारत का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके मित्र सुदामा की पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण-सुदामा की मूर्तियां भी यहां स्थापित हैं। विशेष अवसरों पर यहां कई बड़े आयोजन भी किए जाते हैं। मंदिर प्रबंध समिति प्रशासन के सहयोग से अब इस मंदिर को मित्र स्थल के रूप में नई पहचान देने में जुटी है। 

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