माघ मेला: ये हैं साधुओं की धुनी से जुड़ी वो 7 बातें, जो आम लोग नहीं जानते

Published : Jan 17, 2020, 09:26 AM IST
माघ मेला: ये हैं साधुओं की धुनी से जुड़ी वो 7 बातें, जो आम लोग नहीं जानते

सार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इन दिनों माघ मेला चल रहा है। इस मेले में साधुओं का जमावड़ा हो गया है, उनके पीछे भक्तों के काफिले भी तीर्थराज प्रयाग में आ चुके हैं। पूरे मेला क्षेत्र में धुनी का धुआं उठ रहा है।

उज्जैन. साधुओं के कैंपों में जल रही ये धुनियां बरबस ही सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। ये धुनी साधुओं की जीवन शैली का अभिन्न अंग हैं। जानिए इससे जुड़े कई तथ्य जो आम लोग नहीं जानते-

1. किसी भी साधु द्वारा जलाई गई धुनी कोई साधारण आग नहीं होती। इसे सिद्ध मंत्रों से शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है।
2. कोई भी साधु इसे अकेले नहीं जला सकता। इसके लिए उसके गुरु का होना जरूरी होता है। गुरु की ही अनुमति से धुनी जलाई जाती है।
3. धुनी हमेशा जलती रहे यह जिम्मेदारी उसी साधु की होती है। इस कारण उसे हमेशा धुनी के आसपास ही रहना पड़ता है।
4. अगर किसी कारण से साधु कहीं जाता है तो उस समय धुनी के पास उसका कोई सेवक या शिष्य रहता है।
5. साधुओं के पास जो चिमटा होता है, वह वास्तव में धुनी की सेवा के लिए होता है। उस चिमटे का कोई और उपयोग नहीं किया जाता। इसी चिमटे से धुनी की आग को व्यवस्थित किया जाता है।
6. नागाओं में ऐसी मान्यता है कि अगर कोई साधु धुनी के पास बैठकर कोई बात कहता है, कोई आशीर्वाद देता है तो वह जरूर पूरा होता है। नागा साधु का लगभग पूरा जीवन अपनी इसी धुनी के आसपास गुजारता है।
7. जब वे यात्रा में होते हैं तभी धुनी उनके साथ नहीं होती, लेकिन जैसे ही कहीं डेरा जमाते हैं, वहां सबसे पहले धुनी जलाई जाती है।

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