नागपंचमी: मिथ और सच्चाई, क्या सांप लेते थे अपने साथी की मौत का बदला, क्या सचमुच होते हैं उड़ने वाले सांप?

Published : Jul 25, 2020, 10:44 AM IST
नागपंचमी: मिथ और सच्चाई, क्या सांप लेते थे अपने साथी की मौत का बदला, क्या सचमुच होते हैं उड़ने वाले सांप?

सार

आज (25 जुलाई, शनिवार) नागपंचमी है। इस दिन नागों की पूजा विशेष रूप से की जाती है। हिंदू धर्म में नागों को देवता के रूप में पूजा जाता है। भगवान ने भी नागों को अपने आभूषण और शैय्या के रूप में स्थान दिया है।

उज्जैन. हमारे समाज में नागों से जुड़ी अनेक भ्रांतियां और मान्यताएं पुरातन समय से चली आ रही हैं। आज हम आपको सांपों से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथ व उनसे जुड़ी सच्चाई के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है-

1. क्या सांप अपने साथी की मौत का बदला लेते हैं?
हमारे समाज में ऐसी मान्यता है कि यदि कोई मनुष्य किसी सांप को मार दे तो मरे हुए सांप की आंखों में मारने वाली की तस्वीर उतर आती है, जिसे पहचान कर सांप का साथी उसका पीछा करता है और उसको काटकर वह अपने साथी की हत्या का बदला लेता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह मान्यता पूरी तरह से अंधविश्वास पर आधारित है, क्योंकि सांप अल्पबुद्धि वाले जीव हैं।
सांपों का मस्तिष्क इतना विकसित नहीं होता कि ये किसी घटनाक्रम को याद रख सकें और बदला लें। जीव विज्ञान के अनुसार, जब कोई सांप मरता है तो वह अपने गुदा द्वार से एक खास तरह की गंध छोड़ता है, जो उस प्रजाति के अन्य सांपों को आकर्षित करती है। इस गंध को सूंघकर अन्य सांप मरे हुए सांप के पास आते हैं, जिन्हें देखकर ये समझ लिया जाता है कि अन्य सांप मरे हुए सांप की हत्या का बदला लेने आए हैं।

2. क्या है उड़ने वाले सांपों की सच्चाई?
क्या उड़ने वाले सांप भी होते हैं? ऐसी बात भी हम कही न कहीं सुनते ही हैं, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। जीव विज्ञान के अनुसार, उड़ने वाले सांप नहीं होते। सांप की कुछ विशेष प्रजातियां होती हैं, जो अधिकांश समय पेड़ों पर ही रहती हैं। इस प्रजाति के सांपों में एक नैसर्गिक गुण होता है कि ये उछलकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर पहुंच जाते हैं, लेकिन इन पेड़ों की दूरी बहुत कम होती है। जब ये सांप उछलकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाते हैं तो ऐसी लगता होता है कि जैसे ये उड़ रहे हों।

3. क्या सांपों की मूंछ भी होती है?
ऐसा भी कहा जाता है कि कुछ सांपों की मूंछे भी होती हैं ये तथ्य भी पूरी तरह से अंधविश्वास है। जीव विज्ञान के अनुसार, मूंछ वाले सांप होते ही नहीं हैं, ये किसी शातिर सपेरे के दिमाग की उपज होती है। सांप को कोई खास स्वरूप देने पर अच्छी कमाई हो सकती है। इसी लालच में सपेरे घोड़े की पूंछ के बाल को बड़ी ही सफाई से सांप के ऊपरी जबड़े में पिरोकर सिल देता है।
इसके अलावा जब कोई सांप अपनी केंचुली उतारता है तो कभी-कभी केंचुली का कुछ हिस्सा उसके मुंह के आस-पास चिपका रह जाता है। ऐसे में उस सांप को देखकर मूंछों का भ्रम हो सकता है। सच ये है कि सांप सरीसृप वर्ग के जीव हैं, इनके शरीर पर अपने जीवन की किसी भी अवस्था में बाल नहीं उगते।

4. किस प्रकार सम्मोहित कर लेते हैं सांप?
कुछ लोग मानते हैं कि सांप की आंखों में किसी को भी सम्मोहित करने की शक्ति होती है यानी सांप जिसकी भी आंखों में देख लेता है वह मनुष्य या अन्य कोई प्राणी उस सांप के आदेश का पालन करता है। यह भी अंधविश्वास और कोरी कल्पना के अलावा कुछ नहीं है।

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