इस मंदिर में दिन में 3 बार अलग-अलग रूपों में होती है देवी की पूजा, 51 शक्तिपीठों में से एक है ये मंदिर

Published : Oct 08, 2021, 11:31 AM IST
इस मंदिर में दिन में 3 बार अलग-अलग रूपों में होती है देवी की पूजा, 51 शक्तिपीठों में से एक है ये मंदिर

सार

माता की आराधना का पर्व नवरात्रि (Shardiya Navratri 2021) 7 अक्टूबर, गुरुवार से शुरू हो चुका है। वैसे तो हमारे देश में माता के हजारों मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ बहुत ही विशेष हैं। ऐसा ही एक मंदिर है यूपी के मिर्जापुर के निकट स्थित विंध्यवासिनी मंदिर (Vindhyavasini Temple) ।

उज्जैन. नवरात्रि (Shardiya Navratri 2021 के दौरान हर कोई अलग-अलग तरीकों से माता को प्रसन्न करने का प्रयास करता है। प्रमुख देवी मंदिरों में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। वैसे तो हमारे देश में माता के हजारों मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ बहुत ही विशेष हैं। ऐसा ही एक मंदिर है यूपी के मिर्जापुर के निकट स्थित विंध्यवासिनी मंदिर (Vindhyavasini Temple) । इस मंदिर की कई विशेषताएं हैं। नवरात्रि में यहां भक्तों का सैलाब उमड़ाता है। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…

51 शक्तिपीठों में से एक है ये मंदिर
पूर्वांचल में गंगा नदी के किनारे बसे मिर्ज़ापुर से 8 किमी दूर विंध्याचल की पहाड़ियों में मां विंध्यवासिनी (Vindhyavasini Temple) का मंदिर है। ये 51 शक्तिपीठों में से एक है। इसे जागृत शक्तिपीठ माना जाता है। शिव पुराण में मां विंध्यवासिनी को सती माना गया है तो श्रीमद्भागवत में नंदजा देवी कहा गया है। मां के अन्य नाम कृष्णानुजा, वनदुर्गा भी शास्त्रों में वर्णित हैं। शास्त्रों में इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि आदिशक्ति देवी कहीं भी पूर्णरूप में विराजमान नहीं हैं।
विंध्याचल ही ऐसा स्थान है जहां देवी के पूरे विग्रह के दर्शन होते हैं। देवी को उनका नाम विंध्य पर्वत से मिला और विंध्यवासिनी नाम का शाब्दिक अर्थ है, वह विंध्य में निवास करती हैं। जैसा कि माना जाता है कि धरती पर शक्तिपीठों का निर्माण हुआ, जहां सती के शरीर के अंग गिरे थे, लेकिन विंध्याचल वह स्थान और शक्तिपीठ है, जहां देवी ने अपने जन्म के बाद निवास करने के लिए चुना था।

3 बार रूप बदलती हैं माता
मां विंध्यावासनी (Vindhyavasini Temple) की दिन में 4 बार आरती की जाती है। इन चारों आरती का अपना अलग महत्व है। प्रथम आरती सुबह होती है, जिसमें माता का श्रृंगार बाल रूप में होता है। दोपहर में होने वाली आरती में माता के यौवन रूप के दर्शन होते हैं। शाम और रात के समय की जाने वाली आरती में माता के वृद्धावस्था स्वरूप की पूजा की जाती है।

कैसे पहुंचें?

ट्रेन मार्ग
विंध्यवासिनी मां के दरबार में पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन विंध्याचल है। मंदिर की दूरी यहां से तकरीबन एक किलोमीटर है। इसके अलावा मिर्जापुर रेलवे स्टेशन भी जा सकते हैं।

सड़क मार्ग
सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं राष्‍ट्रीय राजमार्ग 2 यानी कि एनएच 2 से जा सकते हैं। इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इलाहाबाद और वाराणसी से उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन की बसें भी चलती हैं।

वायु मार्ग
मां विंध्यवासिनी दरबार के लिए अगर वायु मार्ग का सहारा लेना चाहते हैं तो सबसे निकटतम एयरपोर्ट वाराणसी के बाबतपुर में है। इसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जानते हैं। यहां से मां विंध्यवासिनी मंदिर की दूरी तकरीबन 72 किलोमीटर है।

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