Sawan: पंचकेदार में से एक है रुद्रप्रयाग का तुंगनाथ मंदिर, यहां होती है शिवजी की भुजाओं की पूजा

Published : Aug 07, 2021, 10:28 AM ISTUpdated : Aug 07, 2021, 11:41 AM IST
Sawan: पंचकेदार में से एक है रुद्रप्रयाग का तुंगनाथ मंदिर, यहां होती है शिवजी की भुजाओं की पूजा

सार

उत्तराखंड (Uttarakhand) में शिवजी (Shiva) के पांच पौराणिक मंदिरों का एक समूह है, जिसे पंचकेदार (Panch Kedar) के नाम से जाना जाता है। इस समूह में केदारनाथ (Kedarnath), तुंगनाथ (Kedarnath), रुद्रनाथ (Rudranath), मध्यमहेश्वर (Madmaheshwar) और कल्पेश्वर (Kalpeshwar) महादेव मंदिर शामिल है। कल्पेश्वर मंदिर को छोड़कर शेष चारों मंदिर शीतकाल में भक्तों के लिए बंद रहते हैं। इनमें से तुंगनाथ (Tungnath) मंदिर रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) जिले में करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस कारण ये दुनिया में सबसे ऊंचाई पर बना शिव मंदिर है। सावन (Sawan) में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

उज्जैन. पंचकेदार में से एक तुंगनाथ (Tungnath) दर्शन के लिए सबसे पहले सोनप्रयाग पहुंचना होता है। इसके बाद गुप्तकाशी, उखीमठ, चोपटा होते हुए तुंगनाथ मंदिर पहुंच सकते हैं। सावन माह में यहां काफी शिव भक्त पहुंचते हैं। इसकी यात्रा बहुत ही कठिन है। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें...

महाभारत (Mahabharat) काल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
- मान्यता है कि ये मंदिर करीब हजार साल पुराना है और इस जगह का संबंध महाभारत काल से भी है। तुंगनाथ से करीब 1.5 किमी दूर चंद्रशिला पीक है। इसकी ऊंचाई करीब 4000 मीटर है। चोपटा से तुंगनाथ एक तरफ की ट्रेकिंग में करीब 1 से 1.30 घंटे का समय लगता है।
- मंदिर के बारे में कथा प्रचलित है कि इसे पांडवों ने बनाया था। कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार से पांडव काफी दुखी थे। वे शांति के लिए हिमालय क्षेत्र में आए थे। उस समय उन्होंने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। 
- इस मंदिर में भगवान शिव के हृदय और भुजाओं की पूजा-अर्चना की जाती है। तुंगनाथ (Tungnath) मंदिर केदारनाथ (Kedarnath) और बद्रीनाथ (Bdrinath) के करीब-करीब मध्य में स्थित है, जिसकी वजह से केदारनाथ और बद्रीनाथ के साथ-साथ चार धाम की यात्रा करने वाले तीर्थयात्री और पर्यटक यहां जरूर आते हैं।

कब और कैसे पहुंचें?
मई से नवंबर तक यहां की यात्रा की जा सकती है। हालांकि यात्रा बाकी समय में भी की जा सकती है, लेकिन बर्फ गिरी होने के कारण से वाहन की यात्रा कम और पैदल यात्रा अधिक होती है। जनवरी व फरवरी के महीने में भी यहां की बर्फ की मजा लेने जाया जा सकता है। दो रास्तों में से किसी भी एक से यहाँ पहुँचा जा सकता है-
- ऋषिकेश से गोपेश्वर होकर। ऋषिकेश से गोपेश्वर की दूरी 212 किलोमीटर है और फिर गोपेश्वर से चोपता चालीस किलोमीटर और आगे है, जो कि सड़क मार्ग से जुड़ा है।
- ऋषिकेश से ऊखीमठ होकर। ऋषिकेश से उखीमठ की दूरी 178 किलोमीटर है और फिर ऊखीमठ से आगे चोपता चौबीस किलोमीटर है, जो कि सड़क मार्ग से जुड़ा है।

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