Tamil Hanuman Jayanti 2022: देश के किस हिस्से में कब मनाया जाता है हनुमान जयंती का पर्व?

Published : Dec 23, 2022, 09:16 AM IST
Tamil Hanuman Jayanti 2022: देश के किस हिस्से में कब मनाया जाता है हनुमान जयंती का पर्व?

सार

Tamil  Hanuman Jayanti 2022: हनुमानजी को कलयुग का जीवंत देवता कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी आज भी जीवित हैं और किसी दुर्गम स्थान पर तपस्या कर रहे हैं। और भी कई मान्यताएं हनुमानजी से जुड़ी हुई हैं।  

उज्जैन. देश के अलग-अलग हिस्सों हनुमानजी को लेकर विभिन्न मान्यताएं प्रचलित हैं। पूरे देश में जहां चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती (Tamil  Hanuman Jayanti 2022) का पर्व मनाया जाता है, वहीं तमिलनाडु में ये पर्व मार्गशीर्ष या पौष मास की अमावस्या को मनाया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, तमिलनाडू में हनुमान जयंती का पर्व मार्गशीर्ष अमावस्या पर मूल नक्षत्र का संयोग हो तब मनाया जाता है और ऐसा न हो तो पौष मास की अमावस्या पर ये पर्व मनाने की परंपरा है। इस पौष मास की अमावस्या 23 दिसंबर, शुक्रवार को है। इसलिए इसी तिथि पर ये पर्व मनाया जाएगा। आगे जानिए इस पर्व से जुड़ी अन्य खास बातें…

हनुमानजी के जन्म तिथि को लेकर मान्यताएं
समूचे उत्तर और मध्य भारत में हनुमान जयंती का पर्व चैत्र मास की पूर्णिमा पर मनाया जाता है। ये तिथि राम नवमी के 7 दिन बाद आती है। हनुमानजी जयंती के अगले दिन से वैशाख मास की शुरूआत मानी जाती है। अनेक धर्म ग्रंथों के अनुसार, अंजनी पुत्र हनुमानजी का जन्म इसी तिथि पर हुआ माना जाता है। इसलिए इस दिन सभी हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन व पूजा आदि की जाती है।

इस दिन भी मनाते हैं हनुमान जयंती
कुछ धर्म ग्रंथों के अनुसार, हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर हुआ था। ये तिथि दीपावली से ठीक एक दिन पहले आती है, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन छोटी दीपावली का पर्व मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इस दिन राजा बलि की पूजा विशेष रूप से की जाती है। हालांकि ये तिथि इतनी प्रचलित नहीं है। देश के कुछ हिस्सों में इस तिथि पर हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है।

यहां 41 दिनों तक मनाया जाता है हनुमान जयंती का पर्व
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हनुमान जयंती का पर्व 41 दिनों तक मनाया जाता है। ये पर्व चैत्र पूर्णिमा से शुरू होता है और वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष के दसवें दिन पर समाप्त होता है। इस दौरान हनुमान मंदिरों की विशेष साज-सज्जा की जाती है और पूजा का आयोजन किया जाता है। कर्नाटक की बात की जाए तो यहां हनुमान जयंती का पर्व मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इसे यहां हनुमान व्रतम के नाम से जाना जाता है।


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