महाशिवरात्रि 2026: 19 साल बाद दुर्लभ संयोग, पूजा-उपाय का मिलेगा कई गुना फायदा

Published : Feb 05, 2026, 04:12 PM IST
महाशिवरात्रि 2026

सार

Maha Shivaratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी अधिक हो गया है। कईं दशकों में ऐसा संयोग बनता है।

Maha Shivaratri 2026 Shubh Yog: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन ग्रहों के कईं दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं जिसके चलते ये पर्व और भी खास हो गया है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार 19 साल बाद महाशिवरात्रि पर ऐसा संयोग देखने को मिल रहा है। आगे जानिए महाशिविरात्रि पर बन रहे इन संयोगों के बारे में…

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19 साल बाद बनेगा दुर्लभ योग

ज्योतिषाचार्य पं. द्विवेदी के अनुसार महाशिवरात्रि पर इस बार ग्रहों का दुर्लभ पुनरावृत्ति योग बन रहा है। इसरे पहले ऐसा दुर्लभ संयोग साल 2007 में बना था। करीब 19 साल बाद एक बार फिर इन्हीं ग्रहों की स्थिति में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। पुनरावृत्ति संयोग हर तरह से शुभ फल फल देने वाला माना गया है। महाशिवरात्रि पर इसके होने से इस पर्व का महत्व और अधिक हो गया है। इस समय केतु सिंह राशि में और चंद्रमा मकर राशि में गोचर करेगा, जिससे त्रिकोण योग बनेगा, जिसे विशेष फलदायी माना जाता है।

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महाशिवरात्रि पर बनेगा चतुर्ग्रही योग

इस बार महाशिवरात्रि पर कुंभ राशि में चतुर्ग्रही संयोग बनता नजर आ रहा है। वर्तमान में कुंभ राशि में राहु, बुध और शुक्र ग्रह स्थित है। महाशिवरात्रि से 2 दिन पहले यानी 13 फरवरी को सूर्य भी इस राशि में प्रवेश करेगा। इस तरह कुंभ राशि में 4 ग्रह एक साथ हो जाएंगे। कुंभ राशि में बुध और सूर्य के साथ होने बुधादित्य और शुक्र के साथ भी सूर्य होने से शुक्रादित्य योग बनेगा। ये दोनों ही योग बहुत अधिक शुभ फल देने वाले माने गए हैं।

पूरे दिन रहेगा सर्वार्थसिद्धि योग

15 फरवरी, रविवार की शाम को 07 बजकर 38 मिनिट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। दिन में जहां महाशिवरात्रि का व्रत किया जाएगा वहीं रात में महादेव का पूजन। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं और श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा। ये भी एक शुभ संयोग है। साथ ही इस दिन सर्वार्थसिद्धि नाम का शुभ योग भी दिन भर रहेगा, जिसके इस दिन किए जाने वाले सभी कामों का शुभ फल प्राप्त होगा।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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