
Blue Sapphire Stone Benefits: ज्योतिष शास्त्र में नीलम रत्न को शनि ग्रह का प्रमुख रत्न माना जाता है। मान्यता है कि सही व्यक्ति द्वारा सही विधि से धारण किया गया नीलम जीवन में तरक्की, धन लाभ और मानसिक स्थिरता ला सकता है। वहीं गलत तरीके से पहनने पर इसके विपरीत प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। इसलिए नीलम धारण करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। आगे जानिए नीलम पहनने से जुड़ी सावधानियां…
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ज्योतिष विद्वानों के अनुसार नीलम रत्न को हमेशा दाएं हाथ की मध्यमा अंगुली यानी सबसे बड़ी उंगली में पहनना शुभ माना जाता है। मध्यमा अंगुली का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है, इसलिए इसी अंगुली में नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है। इसे चांदी, पंचधातु या लोहे की अंगूठी में जड़वाया जा सकता है।
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नीलम धारण करने के लिए शनिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। सूर्योदय के बाद या शाम के समय शनि मंत्रों का जाप करते हुए इसे पहनना चाहिए। धारण करने से पहले रत्न को गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करने की परंपरा भी है।
ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में शनि शुभ स्थिति में होता है या जो शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से प्रभावित होते हैं, उन्हें नीलम लाभ दे सकता है। हालांकि बिना ज्योतिषीय सलाह के यह रत्न पहनने से बचना चाहिए। सिर्फ शौक के लिए नीलम पहनना परेशानी बढ़ा सकता है।
नीलम बहुत तेजी से असर दिखाने वाला रत्न माना जाता है। इसलिए कई लोग इसे पहले कुछ समय तक ट्रायल के रूप में पहनकर देखते हैं। यदि अचानक बेचैनी, डर, स्वास्थ्य समस्या या नुकसान महसूस हो तो इसे तुरंत उतार देने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नीलम शनि ग्रह की ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है। इसे आत्मविश्वास, करियर ग्रोथ और निर्णय क्षमता बढ़ाने वाला रत्न भी माना जाता है। 5 रत्ती से कम का नीलम नहीं पहनना चाहिए या फिर ज्योतिषी की सलाह के अनुसार इसे पहनना चाहिए।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।