
Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में पुखराज को बेहद प्रभावशाली रत्न माना जाता है। इसे रत्नों का राजा भी कहते हैं। यह रत्न गुरु ग्रह से संबंधित है। इसे पहनने से ज्ञान, धन, विवाह और करियर से जुड़े मामलों में शुभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। रत्न ज्योतिष के अनुसार कुछ रत्न ऐसे होते हैं जिन्हें पुखराज के साथ पहनने से बचना चाहिए। जो व्यक्ति ये गलती करता है, दुर्भाग्य उसके पीछे पड़ जाता है। आगे जानिए कौन-से हैं रत्न…
नीलम को शनि ग्रह का रत्न माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार गुरु और शनि की ऊर्जा अलग होती है। ऐसे में बिना विशेषज्ञ सलाह के पुखराज और नीलम एक साथ पहनने से जीवन में असंतुलन, मानसिक तनाव और कार्यों में बाधाएं बढ़ सकती हैं। भूलकर भी पुखराज के साथ नीलम नहीं पहनना चाहिए। ऐसा करने आपके लिए भारी पड़ सकता है।
ज्योतिष शास्त्र में गोमेद को राहु से जोड़ा जाता है। राहु और गुरु एक-दूसरे के शत्रु हैं और एक-दूसरे के विपरीत फल देते हैं। इसलिए पुखराज के साथ गोमेद पहनना कई ज्योतिषी उचित नहीं मानते। इससे निर्णय लेने में भ्रम और आर्थिक परेशानियां बढ़ने की आशंका बताई जाती है।
केतु का रत्न है लहसुनिया। ज्योतिष शास्त्र में गुरु और केतु का संबंध कुछ स्थितियों में ठीक नहीं माना जाता। गुरु एक शुभ ग्रह है जबकि केतु को क्रूर ग्रह माना जाता है। ऐसी स्थिति में इन दोनों के रत्नों को साथ पहनना डेडली कॉम्बिनेशन है। इन दोनों रत्नों को साथ पहनने से मानसिक उलझन, निर्णय लेने में परेशानी या अपेक्षित लाभ न मिलने की बात कही जाती है।
1. पुखराज पहनने से पहले योग्य ज्योतिषी से जरूर सलाह लें।
2. ज्योतिष द्वारा बताए गए कैरेट का पुखराज ही अंगूठी में पहनें।
3. पुखराज पहनने के बाद तामसिक चीजें जैसे मांसाहार व शराब आदि से बचें।
4. असली पुखराज से पीली किरणें निकलती हुई दिखाई देती हैं, नकली में ऐसा नहीं होता।
5. पुखराज को दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में पहनना चाहिए।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।