Roza Rakhne Ki Dua: रोजा रखने और खोलने से पहले हर रोजेदार के लिए जरूरी है ये दुआ पढ़ना

Published : Feb 20, 2026, 09:40 AM IST
Roza Rakhne Ki Dua

सार

Roza Kholne Ki Dua In Hindi: मुस्लिमों का पवित्र महीना रमजान 19 फरवरी से शुरू हो चुका है। इस पूरे महीने में इस्लाम को मानने वाले रोजा रखते हैं। रोजा रखने से पहले और खोलने से पहले खास दुआ यानी प्रार्थना की जाती है।

Roza Rakhne or Kholne ki Dua: रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां और सबसे पाक यानी पवित्र महीना है। इस्लामिक मान्यताओं की अनुसार इसी महीने में पैगंबर मोहम्मद को कुराने का आयतें अल्लाह से मिली थी। यही कारण है कि इस महीने में इस्लाम को मानने वाले रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं। रमजान मास में रोजा रखकर अच्छे काम करने से अल्लाह की रहमत मिलती है, ऐसी कहा जाता है।

रोजा रखना क्यों जरूरी?

इस्लाम में जो 5 सबसे जरूरी फर्ज बताए गए हैं उनमें से रोजा रखना भी एक है। रोजा सिर्फ भूखा रहकर नहीं किया जाता बल्कि इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाता है कि गलती से हमारे द्वारा किसी का कुछ बुरा न हो जाए। रोजा रखकर मुस्लिम समाज के लोग खुदा की इबादत कर सवाब और रहमत पाने की कोशिश करते हैं। इसलिए रोजा सिर्फ खाने से नहीं बल्कि मन-मस्तिष्क से भी जुड़ा है।

रोजा रखने और खोलने की दुआ

रोजा रखने और खोलने से जुड़े कईं जरूरी नियम है। उसके बिना रोजा पूरा नहीं माना जाता। रोजा रखने से पहले हर रोजेदार एक खास दुआ पढ़ता है और रोजा खोलने से पहले भी। इन दुआओं को पढ़ने के खुदा की रहमत मिलती है और से रोजे का पूरा सबाब भी रोजेदार को मिलता है। इसलिए रोजेदार को रमजान के पूरे महीने में रोजा रखने और खोलने से पहले ये दुआ जरूर पढ़नी चाहिए…

रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne ki Dua)

मुस्लिम समाज को लोग रमजान के दौरान सुबह सहरी के साथ रोजे की शुरुआत करते हैं। सहरी से पहले नीयत करना भी जरूरी माना गया है है, क्योंकि यह पैगंबर मुहम्मद साहब की सुन्नत है। इसलिए सहरी से पहले रोजे की दुआ जरूर करें-

'व बिसौमि ग़दिन नवैतु मिन शह्रि रमज़ान'

अर्थ- मैं अल्लाह के लिए रमजान के रोजे की नीयत (संकल्प) करता/करती हूं।

रोजा खोलने की दुआ (Roza Kholne ki Dua)

सूर्यास्त होने के बाद रोजेदार इफ्तार करते हैं। इसके पहले भी दुआ पढ़ी जाती है। ऐसा कहते हैं कि इफ्तार के समय की गई दुआ अल्लाह जरूर कबूल करता है। इफ्तार से पहले ये दुआ जरूर पढ़ें-

‘अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व अला रिज़्किका अफ़्तरतु।’

अर्थ- अल्लाह, मैंने तेरे लिए ये रोज़ा रखा, तुझ पर भरोसा रखकर ईमान लाया, तेरी दी हुई रोज़ी से ही रोज़ा खोला।

 

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