
middle east war: अमेरिका और इजराइल पिछले एक महीने से ईरान पर हमला कर रहे हैं। ईरान भी इन दोनों देशों से अकेले ही टक्कर ले रहा है। इस युद्ध के चलते पूरे दुनिया में तेल की किल्लत बनी हुई है। क्रूड आइल की बढ़ती कीमतों के चलते अनेक देश पेट्रोल और डीजल की कमी से जूझ रहे हैं तो कुछ देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार शनि के अस्त होने के चलते वर्तमान में तेल संकट बना हुआ है। शनि के उदय होने पर ये संकट स्वत: ही खत्म भी हो जाएगा।
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ज्योतिषाचार्य पं. द्विवेदी के अनुसार 13 मार्च 2026 को शनि ग्रह मीन राशि में अस्त हुआ था। इसके बाद ही से देश-दुनिया में तेल की आपूर्ति में परेशानी की स्थिति बनी है। अब ये स्थिति और भी ज्यादा भयावह होती जा रही है। लगभग 40 दिन अस्त रहने के बाद 23 अप्रैल 2026 को शनि ग्रह मीन राशि में पुन: उदय होगा। इसके बाद तेल की आपूर्ति में आ रही बाधा दूर होगी। महीने के अंत तक धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगेगी।
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वर्तमान में शनि और सूर्य दोनों ही मीन राशि में स्थित है। ये दोनों ग्रह एक-दूसरे के शत्रु हैं। शनि जहां तेल का कारक है वहीं सूर्य अग्नि तत्व का कारक है। तेल और अग्नि तत्व के मिलन के कारण भी देश-दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है। 14 अप्रैल को सूर्य मीन से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर जाएगा। इसके बाद ही क्रूड आइल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर ग्रह एक विशेष तत्व का कारक माना गया है, उसी तरह शनि को तेल का कारक ग्रह माना गया है। दुनिया भर के जितने भी तरह के तेल हैं, उन सभी को शनि से जोड़कर देखा जाता है। शनि के राशि परिवर्तन व अस्त-उदय का प्रभाव भी तेल के उत्पादन और कीमतों पर पड़ता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए तेल से इनका अभिषेक भी किया जाता है।
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