
Second Hand Vehicle Documents: देश में सेकंड हैंड गाड़ियों की बिक्री भी जमकर होती है। ओल्ड वाहन लेते समय लोग कई बातें ध्यान में रखते हैं। जिसमें गाड़ी कितनी पुरानी है? कितने किलोमीटर चली हुई है? कंडीशन कैसा है? या गाड़ी कभी दुर्घटना का शिकार तो नहीं हुई है? पुरानी गाड़ी लेते समय लोग इंजन से लेकर उसके बूट तक की अच्छी तरह जांच करते हैं। लेकिन, कुछ चीजों पर ज्यादा जोर नहीं देते हैं जिसका खामियाजा बाद में भुगतना पड़ता है। यहां हम गाड़ी का माइलेज और परफॉर्मेंस के बारे में बात नहीं कर रहे हैं।
दरअसल, हम आपको गाड़ी के पार्ट्स से हटकर कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे, जो सेकंड गाड़ी कार खरीदते समय जरूर अच्छी तरह से चेक करना चाहिए। कई बार चीजें ग्राहक से छुपी रहती हैं और कार देखकर वह इसके बारे में सही से अंदाजा नहीं लगा पाते हैं। तो आइए हम आपको इसके बारे में जानकारी देते हैं।
सेकंड हैंड गाड़ी लेते समय कस्टमर्स को उसके पुराने चीजों के बारे में जानकारी नहीं होता है। कई बार क्राइम या अपराधिक मामलों में शामिल गाड़ी को लोग सस्ती कीमत पर बेच देते हैं। लेकिन, ऐसे कारें पुलिस की पकड़ में एक दिन आ ही जाती है। ऐसे में पुरानी कार लेने से पहले उसके नंबर पर अधिकारिक मामलों की अच्छी तरह जांच कर लें। इसके लिए वाहन का नंबर क्राइम और क्रिमिनल ट्रैकिंग पोर्टल https://www.digitalpolicecitizenservices.gov.in/centercitizen/login.htm पर जाकर चेक कर सकते हैं। इससे पता लगा सकते हैं, कि गाड़ी के ऊपर कहीं कोई अपराधिक मामले तो दर्ज नहीं हैं। ऐसी सूचना मिलने पर कार लेने से बचें।
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कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर भारी भरकम चालान कट जाता है। ऐसे में इससे जितना दूरी बनाएंगे, आपके लिए उतना ही बेहतर होगा। कई बार गाड़ियों पर हेवी चालान कट जाता है और मालिक बिना पैसे भरे वाहन को बेच डालते हैं। ऐसे में पुरानी गाड़ी खरीदते समय उसके ऊपर चालान पहले से है या नहीं इसकी जांच अवश्य करें, क्योंकि एक बार गाड़ी का नंबर आपके नाम पर ट्रांसफर हुआ, तो फिर बकाया आपको ही देना पड़ेगा। यदि गाड़ी के ऊपर पहले से बकाया (चालान) है, तो मालिक को बोलें उसे क्लियर करें। चालान का पूरा डिटेल्स https://echallan.parivahan.gov.in पर ले सकते हैं।
सेकंड हैंड गाड़ी लेने से पहले ऑनर का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) देखना न भूलें। इससे आपको वाहन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। गाड़ी फाइनेंस पर है तो बैंक या लेंडर का नाम लिखा रहेगा। यदि मालिक बोले कि इसकी किस्त पूरी हो चुकी है, तो उससे आप डायरेक्ट नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की मांग करें। मालिक एनओसी दे भी देता है, लेकिन आरसी पर बैंक का नाम लिखा है तो उसे हटाने के लिए बोलिए। लोन पर ली गई गाड़ी पर EMI चल रही हो और उसे आप ले लेते हैं, तो फिर वाहन का बकाया किस्त रकम आपको ही देना पड़ जाएगा।
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