फिटनेस और PUC फ्रॉड पर लगेगा ब्रेक, केंद्र सरकार लाने जा रही नया नियम

Published : Jan 03, 2026, 04:01 PM IST
फिटनेस और PUC फ्रॉड पर लगेगा ब्रेक, केंद्र सरकार लाने जा रही नया नियम

सार

गाड़ियों में फिटनेस धोखाधड़ी रोकने हेतु केंद्र सरकार नए नियम ला रही है। प्राइवेट गाड़ियों के लिए ऑटोमेटेड टेस्ट और जांच का वीडियो प्रूफ अनिवार्य होगा। टेस्ट में फेल होने पर गाड़ी 180 दिन में ठीक करानी होगी, वरना उसे ELV माना जाएगा।

नई दिल्लीः गाड़ियों के फिटनेस और पल्यूशन सर्टिफिकेट में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही बड़े कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन नियमों में कुछ खास बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, प्राइवेट गाड़ियों के लिए ऑटोमेटेड टेस्ट अनिवार्य किए जाएंगे। साथ ही, जांच का वीडियो प्रूफ भी देना होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए कदम का मकसद PUC सर्टिफिकेट के गलत इस्तेमाल को रोकना और बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से निपटना है।

ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, कमर्शियल गाड़ियों की तरह ही अब प्राइवेट गाड़ी मालिकों को भी ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशनों (ATS) पर फिटनेस और पल्यूशन जांच करानी होगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे पारदर्शिता आएगी और यह पक्का होगा कि सिर्फ फिट गाड़ियां ही सड़कों पर चलें।

परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। अगर यह लागू हो जाता है, तो प्राइवेट गाड़ियों को बिचौलियों या कागजी कार्रवाई के जरिए फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिल पाएगा। फिलहाल, देश भर में 160 से ज्यादा ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन काम कर रहे हैं। ड्राफ्ट के मुताबिक, प्राइवेट गाड़ियों, खासकर 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को इन सेंटरों पर फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। ऐसी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी है, जिसे बाद में हर पांच साल में लेना होगा।

सर्टिफिकेट से पहले देना होगा वीडियो

जांच ठीक से हुई है, यह पक्का करने के लिए एक नया डिजिटल नियम भी लाया जाएगा। फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने से पहले, जांच केंद्र या अधिकारी को गाड़ी का जियो-टैग किया हुआ वीडियो अपलोड करना होगा। ड्राफ्ट के मुताबिक, कम से कम 10 सेकंड का जियो-टैग वीडियो अपलोड करने पर ही फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू होगा। इस वीडियो में गाड़ी को आगे, पीछे, दाएं और बाएं से दिखाना होगा, ताकि नंबर प्लेट, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और गाड़ी की हालत साफ-साफ दिख सके। इस कदम का मकसद जांच में होने वाली धोखाधड़ी और पुरानी तारीखों वाले गलत सर्टिफिकेट को रोकना है।

पुरानी गाड़ियों को मिलेंगे 180 दिन

नए नियमों में गाड़ी के फेल होने पर एक समय-सीमा भी तय की जा सकती है। अगर कोई गाड़ी फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाती है, तो मालिक को उसे ठीक कराने के लिए 180 दिनों का समय मिलेगा। अगर इस समय के अंदर गाड़ी को फिट घोषित नहीं किया जाता है, तो उसे 'एंड ऑफ लाइफ व्हीकल' (ELV) माना जाएगा। इसके बाद, गाड़ी को वाहन डेटाबेस में ELV के रूप में रजिस्टर कर दिया जाएगा और वह फिर इस्तेमाल के लायक नहीं रहेगी।

सिर्फ फीस भरने से समय नहीं बढ़ेगा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए नियम उन खामियों को खत्म कर देंगे, जो पहले बिना मरम्मत के लंबे समय तक गाड़ी चलाने की इजाजत देती थीं।

यह बदलाव क्यों जरूरी है?

वायु प्रदूषण और सड़कों पर अनसेफ गाड़ियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह नया बदलाव बहुत अहम है। ऑटोमेटेड जांच और डिजिटल सबूत को अनिवार्य करके, सरकार को उम्मीद है कि वह सर्टिफिकेशन प्रोसेस को साफ-सुथरा बना सकेगी। साथ ही, यह भी पक्का कर सकेगी कि पुरानी गाड़ियां सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों का पालन करें, वरना उन्हें हमेशा के लिए सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा।

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