सच कहें तो ट्रैफिक पुलिस के हाथों पकड़े जाने पर चालान भरना किसी को भी अच्छा नहीं लगता। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लगने वाला जुर्माना न सिर्फ मूड खराब करता है, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ता है।
ट्रैफिक पुलिस का चालान किसी को पसंद नहीं आता। यह न सिर्फ मूड खराब करता है, बल्कि जेब पर भी बोझ डालता है। भारत में सड़क सुरक्षा बनाए रखने के लिए ट्रैफिक नियम तोड़ने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान है।
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अपराध की गंभीरता के आधार पर सज़ा तय होती है, जिसमें जुर्माना और/या जेल भी शामिल है। शराब पीकर गाड़ी चलाना और बिना लाइसेंस के ड्राइविंग जैसे अपराध बहुत गंभीर माने जाते हैं। सरकार ने ऐसे अपराधों को रोकने के लिए 'मोटर व्हीकल (संशोधन) अधिनियम, 2019' लागू किया है।
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भारत में निजी वाहन चालकों के 100 मिलीलीटर खून में 30 मिलीग्राम से ज्यादा अल्कोहल मिलने पर ड्रंक ड्राइविंग का केस बनता है। पहली बार यह अपराध करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना और छह महीने तक की जेल हो सकती है। साथ ही, ड्राइवर का लाइसेंस भी रद्द या सस्पेंड किया जा सकता है।
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अगर कोई ड्राइवर दूसरी बार यह गलती करता है, तो उसे 15,000 रुपये तक का जुर्माना और दो साल तक की जेल हो सकती है। उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी लंबे समय के लिए सस्पेंड या स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। नशे में ड्राइविंग से किसी को चोट लगने पर दो साल और मौत होने पर सात साल तक की जेल हो सकती है।
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अलग-अलग राज्यों में शराब पीने की कानूनी उम्र 18 से 25 साल के बीच है। गुजरात, बिहार, नागालैंड और मणिपुर जैसे राज्यों में शराब पर पूरी तरह से पाबंदी है। वहीं, हरियाणा और गोवा जैसे कुछ राज्यों में यह उम्र 25 साल है। बाकी राज्यों में 21 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोग शराब पी सकते हैं।
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अगर कोई नाबालिग यह अपराध करता है, तो उसके माता-पिता या गाड़ी के मालिक पर कानूनी कार्रवाई होगी। उन्हें तीन साल तक की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी 12 महीने के लिए रद्द कर दिया जाएगा। नाबालिग को 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग की इजाजत नहीं मिलेगी।
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