इलेक्ट्रिक vs पेट्रोल-डीजल कार इंश्योरेंस: ये 6 अंतर हर ड्राइवर को पता होनी चाहिए

Published : Jan 09, 2026, 09:11 PM IST

EV vs Petrol-Diesel Car Insurance: आजकल EVs का ट्रेंड चल रहा है। अब ज्यादातर लोग इलेक्ट्रिक वेहिकल्स ही खरीद रहे हैं। लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि इलेक्ट्रिक और पेट्रोल-डीजल कारों का इंश्योरेंस अलग होता है। जानिए दोनों के बीमा में 5 सबसे बड़े अंतर.. 

PREV
16

गाड़ी के पार्ट्स और कवरेज

EVs में जो पार्ट्स होते हैं, वे पारंपरिक कारों से बिल्कुल अलग हैं। लिथियम-आयन बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर और चार्जिंग सिस्टम जैसे पार्ट्स की कीमत बहुत ज्यादा होती है और इनके नुकसान की संभावना भी ज्यादा होती है। इसलिए EV बीमा में इन पार्ट्स के लिए स्पेशल कवरेज शामिल होता है। वहीं, पेट्रोल और डीजल कारों के इंजन और फ्यूल सिस्टम की कीमत कम होती है और इन्हें रिपेयर करना आसान होता है, इसलिए इनके लिए बीमा आसान और सस्ता होता है।

26

बैटरी सेफ्टी

EV की सबसे कीमती चीज बैटरी होती है। बीमा में बैटरी से जुड़े जोखिमों को शामिल किया जाता है, जैसे शॉर्ट सर्किट, आग या एक्सीडेंटल नुकसान। कुछ पॉलिसीज बैटरी की उम्र घटने यानी डिग्रेडेशन से होने वाले नुकसान को भी कवर करती हैं। पारंपरिक कारों में ऐसा कवर नहीं होता, क्योंकि उनके फ्यूल सिस्टम की कीमत और रिपेयरिंग आसान होती है।

36

मेंटेनेंस और रिपेयर

EV की रिपेयरिंग आसान नहीं होती। इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग और टूल्स चाहिए, जो हर सर्विस सेंटर में उपलब्ध नहीं होते। साथ ही, स्पेयर पार्ट्स की कीमत और उपलब्धता भी बीमा प्रीमियम पर असर डालती है। दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल कारों का मेंटेनेंस कहीं अधिक सस्ता और आसान होता है, इसलिए इनके क्लेम सेटलेमेंट भी अधिक प्रेडिक्टेबल होते हैं।

46

ऐड-ऑन कवरेज

EV बीमा में कुछ ऐड-ऑन मिलते हैं, जो इसे खास बनाते हैं। बैटरी कवर गैर-एक्सीडेंट नुकसान और डिग्रेडेशन से सुरक्षा देता है। होम चार्जिंग यूनिट का कवर चोरी या नुकसान से सुरक्षा करता है। रोडसाइड असिस्टेंस बैटरी फेल होने या चार्जिंग समस्या होने पर मदद करता है। पारंपरिक वाहनों में आमतौर पर ऐड-ऑन इंजन प्रोटेक्शन या टायर कवर तक ही सीमित होते हैं।

56

पर्यावरण और इंसेंटिव

EV बीमा भारत की सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में फिट बैठता है। कई इंश्योरर्स EV मालिकों को डिस्काउंट या इंसेंटिव भी देते हैं, ताकि ज्यादा लोग इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाएं। पेट्रोल और डीजल कारों को आमतौर पर ऐसे फायदे नहीं मिलते, क्योंकि इनके उत्सर्जन से प्रदूषण बढ़ता है।

66

डिप्रिशिएशन और रीसैल वैल्यू

EV की डिप्रिशिएशन मुख्य रूप से बैटरी पर निर्भर करती है। बैटरी की परफॉर्मेंस और रिप्लेसमेंट कॉस्ट भविष्य के बीमा प्रीमियम को प्रभावित करती है। टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ बैटरी की डिग्रेडेशन और रीसाइक्लिंग ऑप्शंस भी बीमा प्रीमियम में बदलाव ला सकते हैं। दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल कारों में डिप्रिशिएशन उम्र और क्लोदिंग-वेल्थ पर बेस्ड होता है, इसलिए बीमा कंपनियों के लिए इसे समझना आसान होता है।

नई कार, बाइक, EV लॉन्च, कीमत, माइलेज और फीचर्स की जानकारी अब सरल भाषा में पाएं। ऑटो इंडस्ट्री ट्रेंड्स, टेस्ट ड्राइव रिव्यू और खरीद गाइड्स के लिए Auto News in Hindi सेक्शन पर जाएं। ऑटोमोबाइल दुनिया की हर बड़ी अपडेट — पहले और भरोसे के साथ।

Read more Photos on

Recommended Stories