
ऑटो डेस्क। कोरोना वायरस का बुरा असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ा है। लोगों की जीवनशैली पर भी इसके तरह-तरह के असर दिखने शुरू हो गए हैं। ऑटो इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स मानकर चल रहे हैं कि फिजिकल डिस्टेन्सिंग और पर्सनल सेफ़्टी के लिए लोग बड़े पैमाने पर लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरी बना लेंगे। इसका असर यह होगा कि सस्ती नई पुरानी कारों की डिमांड काफी बढ़ जाएगी।
एक्सपर्ट्स को यह भी लग रहा है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद कम कीमत वाली गाड़ियों की मांग में अच्छी ख़ासी वृद्धि देखे को मिलेगी। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि भारत में अभी कारों की डिमांड सीमित रहेगी।
...तो ऑटो सेक्टर के लिए अच्छी खबर
अगर कारों की डिमांड बढ़ी तो जाहिर सी बात है लॉकडाउन के बाद की स्थिति ऑटो इंडस्ट्री के लिए अच्छी बात साबित हो सकती है। वैसे भी भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हैं जहां छोटी कारें बड़े पैमाने पर बिकती हैं। भारतीय बाजार में ऑटो कंपनियों के कारोबार का एक बड़ा आधार छोटी कारें ही हैं।
कंपनियों में आक्रामक होड़
मारुति-सुजुकी, हुंडई, रेनोल्ट क्विड, टाटा और दस्तुन समेत तमाम देशी-विदेशी कंपनियां आक्रामक तरीके से छोटी कारों पर फोकस कर रही हैं। लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद से कई कंपनियों ने आने वाली स्थितियों को भुनाने के लिए आकर्षक स्कीम्स और ऑफर अनाउंसमेंट किए हैं। कम ब्याज दरें, कुछ महीनों बाद EMI के भुगतान की सुविधा से लेकर ऑनरोड फुल फाइनेंस तक की स्कीम्स कस्टमर्स के लिए लॉन्च की गई हैं।
इन कारों पर रहेगी नजर
सस्ती कारों में मारुति सुजुकी की अल्टो और एस प्रेसो, रेनोल्ट की क्विड, दस्तुन की रेडी गो और टाटा की टियागो में कम बजट वाले ग्राहक दिलचस्पी लेंगे। माना ये भी जा रहा है कि सस्ती कारों की खरीद के लिए सर्टिफाइड सेकेंड हैंड कारों की बिक्री भी बढ़ेगी।
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