सरकार के इस फैसले की नसीरुद्दीन शाह समेत इन लोगों ने की आलोचना, मॉब लिंचिंग से जुड़ा है मामला

Published : Oct 08, 2019, 05:34 PM IST
सरकार के इस फैसले की नसीरुद्दीन शाह समेत इन लोगों ने की आलोचना, मॉब लिंचिंग से जुड़ा है मामला

सार

प्राथमिकी 3 अक्टूबर को भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई। इसमें राजद्रोह, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, लोक कार्य में बाधा पहुंचाना, शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना समेत कई धाराएं शामिल हैं।

मुंबई. देश में बढ़ रहे मॉब लिंचिंग के मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखने वाले रामचंद्र गुहा, मणि रत्नम और अपर्णा सेन समेत करीब 49 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसे लेकर सांस्कृतिक समुदाय के 180 से अधिक सदस्यों ने इसकी आलोचना की और पूछा कि प्रधानमंत्री को खुला लैटर लिखना 'राजद्रोह की गतिविधि' में कैसे आ सकता है ?  

नसीरुद्दीन शाह समेत इन लोगों ने की आलोचना 

निंदा करने वालों में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, सिनेमेटोग्राफर आनंद प्रधान, इतिहासकार रोमिला थापर और कार्यकर्ता हर्ष मंदर भी शामिल हैं। निर्देशक अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन और लेखक रामचंद्र गुहा समेत अन्य ने जुलाई में प्रधानमंत्री को खत लिख मॉब लिंचिंग (पीट-पीटकर हत्या) की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई थी। लेटर लिखने वालों के खिलाफ पिछले हफ्ते बिहार के मुजफ्फरपुर में कथित राजद्रोह को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
सोमवार, 7 अक्टूबर को जारी एक नए लेटर में जानी-मानी शख्सियतों ने सवाल किया है कि पीएम को खुला लेटर लिखना किस तरह से राजद्रोह की गतिविधि मान लिया गया।

लेटर में लिखी ये बात 

लेटर के मुताबिक, 'सांस्कृतिक समुदाय के हमारे 49 साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, केवल इसलिए क्योंकि उन्होंने नागरिक समाज का सम्मानित सदस्य होने की जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने देश में मॉब लिंचिंग को लेकर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री को खुला खत लिखा था।' इसमें कहा गया, 'क्या इसे राजद्रोह की गतिविधि कहा जा सकता है? या नागरिकों की आवाज बंद करने के लिए अदालतों का दुरुपयोग कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।' इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लेखक अशोक वाजपेयी, जैरी पिंटो, शिक्षाविद इरा भास्कर, कवि जीत थायिल, लेखक शम्सुल इस्लाम, संगीतकार टीएम कृष्ण और फिल्मकार-कार्यकर्ता सबा दीवान समेत अन्य ने प्रतिज्ञा की कि जनता की आवाज बंद करने के विरोध में वह मुंह खोलेंगे। उन्होंने पहले लेटर के प्रति भी समर्थन जताया।

प्राथमिकी 3 अक्टूबर को भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई। इसमें राजद्रोह, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, लोक कार्य में बाधा पहुंचाना, शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना समेत कई धाराएं शामिल हैं।
 

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