Car Insurance: सेंसर-कैमरा डैमेज पर क्लेम लेने से पहले जान लें ये जरूरी नियम

Published : Aug 22, 2026, 02:39 PM IST
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सार

कार के सेंसर, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स का नुकसान कब इंश्योरेंस में कवर होता है? जानें ओन डैमेज, थर्ड पार्टी और आफ्टरमार्केट पार्ट्स से जुड़े जरूरी नियम।

आज की कारों में सेंसर, कैमरा और कई इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स अहम भूमिका निभाते हैं। पार्किंग सेंसर से लेकर रिवर्स कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट तक, ये सिस्टम ड्राइविंग को ज्यादा आसान, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाते हैं।

ऐसे में अगर किसी एक्सीडेंट, आग, बाढ़, चोरी की कोशिश या पॉलिसी में शामिल किसी दूसरी घटना के कारण इन पार्ट्स को नुकसान पहुंचता है, तो कार इंश्योरेंस के तहत क्लेम मिल सकता है। इसके लिए आपकी पॉलिसी में ओन डैमेज कवर होना जरूरी है, जो आमतौर पर कॉम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेंस या स्टैंडअलोन ओन डैमेज पॉलिसी में मिलता है।

हालांकि, क्लेम की मंजूरी नुकसान के कारण, पॉलिसी की शर्तों, डिडक्टिबल और जरूरी जांच पर निर्भर करती है।

क्या खराब सेंसर का खर्च कार इंश्योरेंस में कवर होता है?

मान लीजिए किसी एक्सीडेंट में कार का बम्पर डैमेज हो जाता है और उसके साथ लगा पार्किंग सेंसर भी टूट जाता है। ऐसी स्थिति में सेंसर की रिपेयर या रिप्लेसमेंट कॉस्ट क्लेम का हिस्सा हो सकती है। कार इंश्योरेंस ऑनलाइन खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि पॉलिसी में आपकी अपनी कार के नुकसान के लिए ओन डैमेज कवर शामिल है या नहीं।

सेंसर से जुड़े क्लेम में जरूरत के अनुसार ये खर्च शामिल हो सकते हैं:

● खराब सेंसर की रिपेयर या रिप्लेसमेंट

● सेंसर से जुड़ी वायरिंग या कनेक्टर की रिपेयर

● बम्पर या दूसरे पार्ट्स को हटाने और दोबारा लगाने का लेबर चार्ज

● नया सेंसर लगाने के बाद जरूरी टेस्टिंग और कैलिब्रेशन

इन खर्चों की मंजूरी इंश्योरर के आकलन और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार दी जाती है। अगर सेंसर सामान्य घिसावट, उम्र, इंटरनल फॉल्ट या मेंटेनेंस की कमी के कारण खराब हुआ है, तो इसे आमतौर पर एक्सीडेंटल डैमेज नहीं माना जाता।

क्या कैमरा डैमेज होने पर क्लेम मिल सकता है?

कारों में रिवर्स कैमरा, फ्रंट कैमरा, साइड कैमरा और ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम से जुड़े कैमरे हो सकते हैं। इनकी कार के बाहरी हिस्सों के पास लगे होने के कारण एक्सीडेंट में डैमेज होने की संभावना रहती है। उदाहरण के लिए, पीछे से टक्कर लगने पर टेलगेट या नंबर प्लेट के पास लगा रिवर्स कैमरा टूट सकता है। इसी तरह विंडस्क्रीन डैमेज होने पर उसके पीछे लगा कैमरा या उसका माउंटिंग सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है।

अगर कैमरे को नुकसान किसी कवर की गई घटना के कारण हुआ है, तो क्लेम में जरूरत के अनुसार ये खर्च शामिल हो सकते हैं:

● खराब कैमरे की रिप्लेसमेंट

● वायरिंग और कनेक्टर की रिपेयर

● कैमरा माउंट की रिपेयर या रिप्लेसमेंट

● सिस्टम टेस्टिंग

● जरूरी कैलिब्रेशन

कई आधुनिक कारों में कैमरा बदलने के बाद कैलिब्रेशन जरूरी होता है, ताकि वह वाहन के दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के साथ सही तरीके से काम कर सके। सिर्फ कैमरे में टेक्निकल फॉल्ट आ जाना क्लेम के लिए पर्याप्त नहीं है। नुकसान का किसी कवर की गई घटना से सीधा संबंध होना जरूरी है।

इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के नुकसान पर भी मिल सकता है कवर

आधुनिक कारों में कई इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स लगे होते हैं, जैसे इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, इन्फोटेनमेंट स्क्रीन, कंट्रोल मॉड्यूल, स्विच और वायरिंग। अगर एक्सीडेंट, आग, बाढ़ या पॉलिसी में कवर किसी अन्य घटना के कारण इन पार्ट्स को सीधा नुकसान होता है, तो उनकी रिपेयर या रिप्लेसमेंट कॉस्ट क्लेम में शामिल हो सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक डैमेज कई बार बाहर से दिखाई नहीं देता। इसलिए वर्कशॉप डायग्नोस्टिक स्कैन या टेक्निकल रिपोर्ट के जरिए यह पता लगा सकती है कि खराबी एक्सीडेंट से हुई है या किसी इंटरनल इलेक्ट्रिकल या टेक्निकल फॉल्ट की वजह से। यह अंतर क्लेम के लिए जरूरी है। उदाहरण के लिए, एक्सीडेंट से डैमेज हुई इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट और बिना किसी बाहरी घटना के अचानक खराब हुई यूनिट को इंश्योरर एक जैसा नहीं मानता।

फैक्ट्री-फिटेड और आफ्टरमार्केट इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स में अंतर

कार के साथ कंपनी की ओर से पहले से दिए गए सेंसर, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इंश्योरेंस ट्रीटमेंट बाद में लगवाए गए इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज से अलग हो सकता है। अगर आपने कार खरीदने के बाद अलग से कैमरा, म्यूजिक सिस्टम या कोई दूसरी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरी लगवाई है, तो उसका विवरण इंश्योरर को देना पड़ सकता है।

कुछ आफ्टरमार्केट इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज को पॉलिसी में कवर कराने के लिए उन्हें पॉलिसी शेड्यूल में डिक्लेयर करना और अतिरिक्त प्रीमियम देना जरूरी हो सकता है। इसलिए कार में बाद में लगवाया गया हर इलेक्ट्रॉनिक पार्ट अपने आप इंश्योरेंस में कवर होगा, ऐसा मानना सही नहीं है। पॉलिसी डॉक्यूमेंट में उसका कवर जरूर चेक करें।

थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में अपनी कार के पार्ट्स कवर नहीं होते

थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस मुख्य रूप से आपकी कार के कारण किसी दूसरे व्यक्ति को हुई चोट, मृत्यु या उसकी प्रॉपर्टी को हुए नुकसान से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी को कवर करता है। अगर आपकी अपनी कार का सेंसर, कैमरा या इलेक्ट्रॉनिक पार्ट डैमेज हो जाता है, तो सिर्फ थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस उसकी रिपेयर का खर्च नहीं देता। अपनी कार को हुए ऐसे नुकसान के लिए कॉम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेंस या स्टैंडअलोन ओन डैमेज कवर की जरूरत होती है।

निष्कर्ष

कार इंश्योरेंस सेंसर, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के नुकसान को कवर कर सकता है, बशर्ते नुकसान किसी ऐसी घटना से हुआ हो जो आपकी पॉलिसी में कवर है और आपके पास ओन डैमेज प्रोटेक्शन मौजूद हो। एक्सीडेंटल डैमेज और सामान्य इलेक्ट्रिकल या टेक्निकल खराबी के बीच अंतर समझना जरूरी है। साथ ही, कार में बाद में लगवाए गए इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स या एक्सेसरीज को सही तरीके से डिक्लेयर करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। क्लेम की मंजूरी, डिडक्टिबल, डेप्रिसिएशन और अन्य शर्तें आपकी पॉलिसी और नुकसान की परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।

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