
8th Pay Commission Latest News: 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए कम्यूटेड पेंशन को लेकर एक अहम मांग सामने आई है। कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने सरकार से कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करने की सिफारिश की है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कम्यूटेशन का विकल्प चुनने वाले पेंशनर्स को चार साल पहले पूरी मूल पेंशन वापस मिल सकेगी। ज्यादा मूल पेंशन पाने वालों को इसका लाभ और अधिक हो सकता है।
मौजूदा नियमों के तहत पेंशन का एक हिस्सा कम्यूट कराने पर उस हिस्से की कटौती 15 साल तक जारी रहती है। इसके बाद कम्यूट की गई पेंशन बहाल होती है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जिस समय यह व्यवस्था बनाई गई थी, उस समय की ब्याज दर, जीवन प्रत्याशा और आर्थिक परिस्थितियां आज से काफी अलग थीं। इसलिए अब बहाली की अवधि की दोबारा समीक्षा जरूरी है।
कम्यूटेड पेंशन की अवधि घटाने की मांग कई कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने उठाई है। NC-JCM, AIDEF, FNPO और भारत पेंशनर्स समाज समेत कई संगठन 11 साल में पेंशन बहाल करने के पक्ष में हैं। वहीं AINPSEF ने 10 साल की अवधि का सुझाव दिया है, जबकि IRTSA ने 12 साल में बहाली का प्रस्ताव रखा है।
इस प्रस्ताव को एक उदाहरण से समझें। अगर किसी पेंशनर की मूल पेंशन ₹35,000 महीने है और वह 40 फीसदी पेंशन कम्यूट करता है, तो कम्यूट किया गया हिस्सा ₹14,000 होगा। मौजूदा व्यवस्था में इस रकम की कटौती 180 महीने यानी 15 साल तक होती है। इस दौरान कुल कटौती ₹25.20 लाख बैठती है।
अगर बहाली की अवधि 11 साल कर दी जाती है, तो कटौती 132 महीने तक होगी। इस तरह कुल कटौती ₹18.48 लाख रह जाएगी। दोनों रकम के बीच ₹6.72 लाख का अंतर है। यानी प्रस्ताव लागू होने पर इस उदाहरण में पेंशनर को चार साल पहले पूरी पेंशन मिलने लगेगी।
NC-JCM ने भी कम्यूटेशन के मूल्य और पेंशन कटौती के आधार पर अपनी गणना पेश की है। संगठन के अनुसार, 61 साल की उम्र में कम्यूटेशन करने वाले पेंशनर के उदाहरण में कम्यूटेशन राशि और लगातार होने वाली मासिक कटौती को देखते हुए करीब 10 साल में रकम की भरपाई हो जाती है। इसी आधार पर संगठन का मानना है कि 11वें साल में कम्यूटेड पेंशन बहाल करना उचित होगा।
भारत पेंशनर्स समाज का कहना है कि 15 साल की बहाली व्यवस्था करीब चार दशक पहले की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। तब से ब्याज दरों, जीवन प्रत्याशा और आर्थिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। संगठन इसी बदलाव को आधार बनाकर 11 साल की बहाली की मांग कर रहा है।
अब पेंशनर्स की नजर 8वें वेतन आयोग से जुड़ी सिफारिशों पर है। हालांकि, 11 साल में कम्यूटेड पेंशन बहाली का प्रस्ताव अभी मांग और सिफारिश के स्तर पर है। इसे लागू करने का अंतिम फैसला सरकार और संबंधित प्रक्रिया के तहत ही होगा। अगर यह मांग स्वीकार होती है, तो कम्यूटेशन का विकल्प चुनने वाले लाखों पेंशनर्स के लिए यह लंबे समय में महत्वपूर्ण आर्थिक राहत साबित हो सकती है।
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