
8th Pay Commission Fitment Factor Update: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। इसी बीच संसद में एक ऐसा सवाल पूछा गया, जिसने लाखों कर्मचारियों का ध्यान खींच लिया। सवाल यह था कि क्या अब फिटमेंट फैक्टर तय करते समय परिवार में सिर्फ 3 नहीं, बल्कि 5 लोगों को आधार माना जाएगा? इस पर सरकार ने पहली बार अपनी स्थिति साफ की है। आइए जानते हैं सरकार ने क्या जवाब दिया और आपकी सैलरी कैलकुलेशन पर इसका क्या असर पड़ेगा...
जब भी कोई वेतन आयोग आपकी मिनिमम सैलरी (न्यूनतम वेतन) और फिटमेंट फैक्टर तय करता है, तो वह यह मानकर चलता है कि आपके परिवार में 3 सदस्य हैं (आप, आपकी पत्नी या पति और बच्चा)। इन्हीं 3 लोगों के खर्चे के आधार पर आपकी बेसिक सैलरी का फॉर्मूला तैयार होता है। लेकिन, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के दौर में महंगाई आसमान छू रही है। हर सरकारी कर्मचारी अपने बूढ़े माता-पिता की भी देखभाल करता है। ऐसे में परिवार को 3 लोगों का नहीं, बल्कि 5 लोगों (माता-पिता सहित) का माना जाए। इसी 5 लोगों की 'फैमिली यूनिट' के खर्चे के हिसाब से फिटमेंट फैक्टर और नई सैलरी तय हो।
राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने जब सीधे सरकार से पूछा कि क्या कर्मचारी संगठनों की इस '5 सदस्यों वाली डिमांड' पर कोई बात हो रही है? क्या आयोग कर्मचारियों की बात सुन रहा है? इस पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 28 जुलाई को लिखित जवाब देते हुए जो कहा, वह बहुत दिलचस्प है। सरकार ने साफ तौर पर अपने हाथ पीछे खींचते हुए कहा, 'हमें अंदर की कोई जानकारी नहीं है।' मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, '3 नवंबर 2025 को जब 8वें वेतन आयोग का गठन हुआ था, तभी यह तय हो गया था कि आयोग अपना काम करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। आयोग के नियमों में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि उसे अपनी हर मीटिंग, चर्चा या फॉर्मूले की जानकारी सरकार को देनी होगी। इसलिए, वेतन आयोग ने अब तक कितनी बैठकें की हैं, किन यूनियनों से बात की है, या '3 बनाम 5' सदस्यों वाले नियम पर क्या फैसला हो रहा है, इसका कोई भी डेटा फिलहाल सरकार के पास मौजूद नहीं है।'
फिलहाल इसका जवाब 'नहीं कहा जा सकता' है। सरकार ने यह नहीं कहा कि प्रस्ताव मंजूर हो गया है और न ही इसे खारिज किया है। सिर्फ इतना बताया गया है कि आयोग स्वतंत्र तरीके से काम कर रहा है और उसकी आंतरिक चर्चा की जानकारी सरकार के पास नहीं है। यानी अभी इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक (Multiplier) है, जिसके आधार पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़ाई जाती है। इसी के आधार पर तय होता है कि नई सैलरी स्ट्रक्चर में किसी कर्मचारी की बेसिक पे कितनी होगी। इसका असर सिर्फ सैलरी पर ही नहीं, बल्कि पेंशन और कई दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर भी पड़ता है।
संसद में सरकार के इस जवाब का सबसे बड़ा मतलब यह है कि अभी फिटमेंट फैक्टर, परिवार के आकार या नई सैलरी को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार ने साफ कर दिया है कि आयोग स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और उसकी आंतरिक प्रक्रिया की जानकारी सरकार के पास भी नहीं है। इसलिए अलग-अलग जगह चल रहे कई दावों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना बेहतर होगा।
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