
8th Pay Commission Fitment Factor: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाएं अब तेज हो गई हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित हुए इस आयोग को काम करते हुए 10 महीने पूरे हो रहे हैं। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बना यह पैनल आने वाले महीनों में जयपुर, चंडीगढ़, पुडुचेरी और बेंगलुरु जैसे शहरों में कर्मचारी संगठनों के साथ अहम बैठकें करने जा रहा है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर है, जिसके आधार पर तय होगा कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन में कितना इजाफा होगा। आइए जानते हैं कि न्यूनतम बेसिक पे को लेकर कर्मचारी यूनियनों ने क्या मांग रखी है, इस पर अंतिम फैसला कब तक आ सकता है और क्या सच में न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से ₹72,000 हो जाएगी...
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। 6वें वेतन आयोग (6th Pay Commission) में 1.86 फिटमेंट फैक्टर तय हुआ था। 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।
8वें वेतन आयोग में बढ़ती महंगाई, जीवनयापन (Livelihood) और मेडिकल खर्चों को देखते हुए कर्मचारी यूनियनें इस बार 3.61 से लेकर 4.00 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। अलग-अलग संगठनों ने सरकार के सामने अपनी जरूरत के हिसाब से आंकड़े रखे हैं।
| कर्मचारी संगठन / यूनियन | प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर | लेवल-1 की संभावित न्यूनतम बेसिक सैलरी |
|---|---|---|
| MSA (Survey of India) | 3.61 | करीब ₹65,000 (₹64,980) |
| NCJCM Staff Side & BPS | 3.833 | करीब ₹69,000 |
| BPMS | 4.00 | ₹72,000 |
अगर 3.61 का फॉर्मूला लागू होता है तो लेवल-1 की बेसिक सैलरी ₹65,000 के आसपास पहुंचेगी, जबकि 4.00 का फैक्टर लागू होने पर यह सीधे ₹72,000 हो जाएगी। यानी इन दोनों प्रस्तावों के बीच ही हर महीने करीब ₹7,020 की बेसिक पे का फर्क है।
नहीं, यह समझना बहुत जरूरी है कि ₹65,000, ₹69,000 या ₹72,000 के आंकड़े अभी सिर्फ कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव (Demands) हैं, सरकार का अंतिम फैसला नहीं। कैबिनेट ने 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है। आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों की रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंप सकता है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही केंद्रीय कैबिनेट तय करेगी कि कर्मचारियों को वास्तव में कितना फिटमेंट फैक्टर मिलेगा।
बेसिक सैलरी में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का सीधा फायदा सिर्फ सेवारत कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स को भी मिलेगा। बेसिक पे बढ़ते ही महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), ग्रेच्युटी और पेंशन रिवीजन की रकम में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी।
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