8th Pay Commission BIG ALERT: 2027 में आएगा फैसला, लेकिन पैसा मिलेगा 2030 में? जाने ताजा अपडेट

Published : Jun 26, 2026, 02:02 PM IST
8th CPC

सार

8th Pay Commission Update: क्या वाकई केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ी सैलरी पाने के लिए साल 2030 तक का इंतजार करना पड़ेगा? जानिए कहां तक पहुंचा है 8वें वेतन आयोग का काम?

8th CPC News Today: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का फायदा कब मिलेगा? हालिया घटनाक्रम, एक्सपर्ट्स की राय और कयासों के बाजार में एक बात बहुत तेजी से फैल रही है कि नए पे कमीशन का पूरा फायदा मिलते-मिलते साल 2030 आ जाएगा। हालांकि, 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन सवाल है कि क्या वाकई नए वेतन आयोग के पैसों के लिए आपको इतना लंबा इंतजार करना पड़ेगा या फिर कहानी में कोई ट्विस्ट है? आइए एक्सपर्ट्स के दावों और सरकारी कमिटी के मौजूदा काम की रफ्तार से समझते हैं...

8वें वेतन आयोग का फायदा मिलने में क्यों हो सकती है देरी?

भारत में आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित किया जाता है, जो सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन संरचना की समीक्षा करता है। 8वें वेतन आयोग की घोषणा हो चुकी है और आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और हितधारकों से सुझाव ले रहा है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली कमेटी को फाइनल सिफारिशें सौंपने में कम से कम 18 महीने का समय लग सकता है। यानी फरवरी या अप्रैल 2027 से पहले कोई आधिकारिक रिपोर्ट टेबल नहीं होने वाली है। जब कमिटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपती है, तो उसे पूरी तरह से रिव्यू करने, कैबिनेट की मंजूरी मिलने और अलग-अलग विभागों में नए नियम (सैलरी स्ट्रक्चर, अलाउंस, फिटमेंट फैक्टर) लागू होने में 2 से 3 साल का वक्त लग सकता है।

8वें पे कमीशन को लेकर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अप्रैल 2027 में रिपोर्ट आती है और वहां से अगले 2-3 साल का वक्त रोलआउट में लगता है, तो पूरा पैसा और बढ़ा हुआ एरियर कर्मचारियों के हाथ में पूरी तरह आते-आते साल 2029 का अंत या 2030 की शुरुआत हो सकती है। यही वजह है कि 2030 तक बात खिंचने की आशंका जताई जा रही है।

8वें वेतन आयोग का काम अभी कहां तक पहुंचा है?

डेटा पोर्टल और डेडलाइन

रिपोर्ट्स के अनुसार, कमिशन का काम बैकस्टेज पर काफी तेजी से चल रहा है। कमेटी ने सुझाव लेने की तारीख पहले ही बंद कर दी है, लेकिन विभिन्न स्टेकहोल्डर्स और संगठनों से ऑनलाइन डेटा जुटाने का काम 30 जून 2026 तक चल रहा है।

राज्यों के दौरे

कमिटी अलग-अलग राज्यों में जाकर कर्मचारी यूनियनों से मिल रही है। इसी सिलसिले में 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर (ओडिशा) और 9-10 जुलाई को कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में बड़ी बैठकें होने जा रही हैं।

यूनियनों की भारी डिमांड

रेलवे (IRTSA) और डिफेंस (AIDEF) जैसे बड़े संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹52,600 से ₹69,000 तक करने की मांग रखी है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि मौजूदा महंगाई और घर चलाने के खर्चों को देखते हुए न्यूनतम वेतन में बड़ा संशोधन जरूरी है।

Fitment Factor पर क्यों टिकी हैं नजरें?

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम मुद्दों में से एक है। फिटमेंट फैक्टर तय करता है कि कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को कितने गुणा बढ़ाकर नई सैलरी तय की जाएगी। कुछ संगठनों ने 2.92, 3.50 और 3.80 तक के फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है। अगर सरकार इनमें से किसी हाई फैक्टर को स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है।

 

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