
बिजनेस डेस्क: फिच सॉल्यूशंस रेटिंग एजेंसी ने 2020-21 में देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 4.6% से घटाकर 1.8% कर दिया है। इकोनॉमी पर कोविड-19 के असर को देखते हुए फिच ने अनुमान कम किया है। उसका कहना है कि बड़े पैमाने पर आय घटने से निजी खपत घटने की आशंका है। साथ ही कहा है कि तेल की कीमतों में कमी और कोविड-19 का संक्रमण बढ़ने की वजह से हम अलग-अलग देशों के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में लगातार कमी कर रहे हैं। इसमें आगे भी कमी का अनुमान है।
अनिश्चितताओं की वजह से इंडस्ट्री में खर्चों कमी
फिच सॉल्यूशंस का कहना है कि अनिश्चितताओं की वजह से इंडस्ट्री खर्चों में कमी कर रही है। इससे निवेश घटने की आशंका है। सरकार की ओर से राहत पैकेज में तेजी नहीं दिखाने के चलते अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी। फिच ने चीन की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 2.6% से घटाकर 1.1% किया है। उसका कहना है कि निजी खपत और एक्सपोर्ट घटने की वजह से ग्रोथ पर असर पड़ेगा।
एशिया की आर्थिक विकास दर शून्य रह सकती है
कोविड-19 की वजह से इस साल एशिया की आर्थिक विकास दर शून्य रह सकती है। यदि ऐसा हुआ तो यह पिछले 60 साल का सबसे खराब प्रदर्शन होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पिछले हफ्ते यह आशंका जताई थी। साथ ही कहा था कि आर्थिक गतिविधियों के मामले में अन्य क्षेत्रों की तुलना में एशिया अब भी बेहतर स्थिति में है। फिर भी कोविड-19 का एशिया-प्रशांत क्षेत्र में गंभीर असर होगा।
इन एजेंसियों ने भी वृद्धि दर का अनुमान घटाया
IMF के अनुमान के मुताबिक, कोरोना के कारण 2020 में भारत की विकास दर 1.9 फीसदी रह सकती है। वर्ल्ड बैंक ने भी 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 1.5 से 2.8 प्रतिशत के बीच रखा है। वहीं, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर चार प्रतिशत किया है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया है।
(फाइल फोटो)
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