डॉलर के मुकाबले में आज भारतीय रुपए (Dollar Vs Rupee) में 26 पैसे से ज्यादा की गिरावट आ गई है। जिसकी वजह से रुपए के मुकाबले डॉलर 76 रुपए कके करीब पहुंच गया है। जिसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। आइए आपको भी बताते हैं।
बिजनेस डेस्क। आज सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन डॉलर के मुकाबले रुपए (Dollar Vs Rupee) में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जिसकी वजह से रुपए के मुकाबले डॉलर 76 रुपए के काफी नजदीक पहुंच गया है। इस गिरावट के पीछे कई कारण बतााए जा रहे हैं। जिसमें क्रूड ऑयल में तेजी (Crude Oil Price), अमरीकी ट्रेजरी यील्ड में इजाफा, डॉलर इंडेक्स में मजबूती, विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली आदि शामिल हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रुपया किस लेवल पर कारोबार कर रहा है। इस पर आम लोगों की जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ेगा और वो 9 काण कौन से है जिसकी वजी से रुपये में गिरावट देखने को मिल रही है।
पाकिस्तान ही नहीं बल्कि रुपये में भी है गिरावट बीते कुछ समय से पाकिस्तानी रुपए के गिरावट की काफी बाते हो रही हैं। भारतीय मीडिया में पाकिस्तानी रुपया के रिकॉर्ड लो लेवल पर गिरने की खबरें आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर भारतीय रुपये के गिरने की शुरूआत हो चुकी है। आज भारतीय रुपए में 11 महीने की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जिसकी वजह से भारतीय रुपया 75.9600 रुपए पर पहुंच गया। आंकड़ों की बात करें तो भारतीय रुपए की शुरुआत गिरावट के साथ 75.7075 रुपए के साथ हुई थी। जोकि 75.9600 रुपए के साथ उच्चतम स्तर के साथ हुई। एक दिन पहले डॉलर के मुकाबले रुपया 75.6975 रुपए पर बंद हुआ था। मौजूदा समय में दोपकर 2 बजकर 10 मिनट पर रुपया 23 पैसे की गिरावट के साथ 75.9300 रुपए पर कारोबार कर रहा है।
रुपया में आई गिरावट के कारण
यूएस ट्रेजरी यील्ड के एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने रुपए में गिरावट देखने को मिली है।
अमरीकी डॉलर की मजबूती से रुपए में गिरावट आई है।
18 नवंबर से एफआईआई ने 5 अरब डॉलर मूल्य की शुद्ध बिक्री की है।
विदेशी निवेशकों ने साल के अंत से पहले मुनाफावसूली करना शुरू कर दिया है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की तेज उछाल भी रुपए के गिरने का कारण है।
यूएस फेड ने अपनी आसान मुद्रा नीति वापस ले ली और दरों को सख्त करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
यूएस फेड महंगाई पर लगाम लगाने के लिए तैयार हो गया है, जिससे डॉलर में मजबूती आई है।
रिकॉर्ड व्यापार घाटा रुपए की गिरावट का अहम कारण बना हुआ है।
इकोनॉमी पर ओमाइक्रोन तनाव के प्रभाव पर अनिश्चितता से भी रुपया कमजोर पड़ रहा है।
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रुपए के गिरने से आम जनता की जेब पर असर
विदेशी सामान होगा महंगा हो जाएगा। इंपोर्ट होने वाले सामान पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च होंगे। जिससे उनकी कीमत में उछाल देखने को मिलेगा। भारत में इंपोर्टेड सामान का काफी क्रेज है। जिसमें घड़ियां, जूते, परफ्यू , कपड़े आदि हैं।
विदेश में पढ़ाई करना महंगा होगा। दुनियाभर की यूनिर्वसटिीज में भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ाई करने के जाते हैं। ऐसे में उनके पेरेंट्स में फीस से लेकर रहने तक के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे। जोकि काफी एक्सपेंसिव हो जाएगा।
पेट्रोल और डीजल की कीमत पर असर देखने को मिलेगा। भारत 80 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। जिसके लिए उसे अब ज्यादा रुपया खर्च करना होगा। वैसे भी क्रूड ऑयल पहले से ही महंगा हो रहा है। ऐसे में भारत पर डबल मतार पड़ेगी। जिसकी वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा देखने को मिल सकता है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट के फेयर पर अससर पड़ता हुआ दिखाई देगा। डीजल के दाम में इजाफा होने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट के फेयर में इजाफा देखने को मिलता है। वहीं आज भी देश में ट्रेनें डीजल से ही चल रही हैं। जिसका असर फेयर पड़ना तय है।
फल और सब्जियों की कीमत में पर असर देखने को मिलेगा। वास्तव में देश में फल और सब्जियों की कीमत पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट एड किया जाता है। जब ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में इजाफा होता है तो फल और सब्जियों के साथ दूसरे सामानों में भी तेजी आ जाती है।
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