
नई दिल्ली: सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (एमएसएमई) मंत्रालय के लिए 2020-21 में 7,572.20 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह मंत्रालय का अब तक का सबसे ऊंचा बजट है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को अपना दूसरा बजट पेश करते हुए एमएसएमई क्षेत्र के लिए कई उपायों की घोषणा की।
इनमें खातों के आडिट के लिए कारोबार की सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करना और एमएसएमई उद्यमियों को कर्ज प्रदान करने की योजना शामिल है। मंत्रालय की प्रमुख रोजगार सृजन योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे ऊंचा 2,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
स्व रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाएगा
इसके तहत परंपरागत कारीगरों तथा ग्रामीण-शहरी बेरोजगार युवाओं को मदद कर गैर कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उपक्रम स्थापित कर स्व रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाएगा। सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा, ‘‘अभी तक सिर्फ एक करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को अपने खाते का लेखाकर आडिट कराना पड़ता था। छोटे खुदरा कारोबारियों, व्यापारियों और दुकानदारों पर अनुपालन का बोझ कम करने के लिए मैं आडिट के लिए कारोबार की सीमा को मौजूदा के एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की घोषणा करती हूं।’’
उन्होंने कहा कि एमएसएमई को बिना गारंटी के कर्ज उपलब्ध कराने को एक योजना शुरू की जाएगी।
सीतारमण ने कहा कि इसके अलावा सरकार ने रिजर्व बैंक से एमएसएमई के लिए ऋण पुनर्गठन की सुविधा को एक साल बढ़ाकर 31 मार्च, 2021 करने को कहा है।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
(फाइल फोटो)
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