
बिजनेस डेस्क। भारतीय विनिर्माण उद्योग के स्वास्थ्य में दिसंबर में और सुधार हुआ, नए काम की वृद्धि और गति में कमी के बावजूद उत्पादन तेज रहा। IHS मार्किट द्वारा जारी किए गए डाटा ने दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स 55.5 पर दिखाया, हालांकि, समग्र परिचालन स्थितियों में एक मजबूत सुधार की ओर इशारा किया जो कि ऐतिहासिक मानकों से ऊंचा था। वैसे दिसंबर में मैन्फैक्चरिंग सेक्टर 10 महीने हाई से नीचे आ गया है। नवंबर के महीने में यह लेवल 57.6 देखने को मिला था।
इकोनॉमी में हो रहा है सुधार
सर्वे के अनुसार एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी यानी भारत में कोरोना वायरस की वजह से आई मंदी का असर कम हो रहा है। जीडीपी में भी लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। आईएचएस मार्किट के पोलियाना डी लीमा के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दिसंबर के आंकड़ें काफी अच्छे हैं, वो भी तब जब देश में ओमाइक्रोन के मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है। आर्थिक सुधार जारी है, क्योंकि कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से नए काम हासिल करने में सफल रही हैं। भविष्य में उत्पादन को लेकर पिछले महीने उम्मीदें मजबूत हुईं लेकिन आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों के बारे में चिंताओं, कोरोन वायरस के नए ओमिक्रॉन संस्करण के तेजी से प्रसार और मुद्रास्फीति के दबाव ने इन उम्मीदों को कम किया है। बता दें कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले फिर से तेजी पकड़ चुके हैं।
नौकरियों पर पड़ा असर
अगर बात रोजगार की करें तो सेक्टर में पिछले महीने थोड़ा कम हुआ है। जबकि नवंबर के महीने के 16 महीनों के बाद सेक्टर में रोजगार देखने को मिला था। वैसे नौकरी जाने वालों की संख्या काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार कीमत में इजाफा होने के कारण दिसंबर के महीने में व्यावसायिक विश्वास को बाधित किया, साथ ही फर्मों को भी चिंता थी कि महामारी और सप्लाई चेन में बाधा आ सकती है।
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