
बिजनेस डेस्क। भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स के एक्सपोर्ट में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इंडिया सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) की रिपोर्ट में बताया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का एक्सपोर्ट दिसंबर 2020 में बढ़कर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 8,806 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसमें मोबाइल हैंडसेट का हिस्सा 35 फीसदी है। सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के मुताबिक, दिसंबर 2019 की तुलना में 50 फीसदी से ज्यादा मोबाइल निर्यात किए गए। इस संगठन के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स के निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन का ही रहा है।
कोविड-19 महामारी के बावजूद बढ़ा निर्यात
कोविड-19 महामारी और 45 दिन तक लगातार उत्पादन बंद रहने के बावजूद चालू वित्त वर्ष में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स,का निर्यात 50 हजार करोड़ रुपए को पार कर गया है। मोबाइल हैंडसेट इंडस्ट्री ने महामारी के दौरान निर्यात और घरेलू मांग को पूरा करने के साथ दिसंबर 2020 तक 14 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का एक्सपोर्ट किया।
पीएलआई स्कीम रही कारगर
केंद्र सरकार ने जुलाई 2020 में मोबाइल फोन सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) स्कीम शुरू की थी। इसमें एप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर फॉक्सकॉन और विन्स्ट्रॉन, सैमसंग, लावा और डिक्शन जैसी कंपनियों ने भागीदारी की थी। इस स्कीम में 11 हजार करोड़ रुपए के कुल निवेश प्रस्ताव आए।
2025 तक घरेलू बाजार कितना बढ़ेगा
सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के मुताबिक, देश का इलेक्ट्रॉनिक बाजार 65 अरब डॉलर (करीब 4.7 लाख करोड़ रुपए) पर पहुंच गया है। इसमें बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन का ही है। बता दें कि राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 230 अरब डॉलर (करीब 16.77 लाख करोड़ रुपए) का निर्यात करना होगा।
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