EPFO pension rules 2026: EPFO पेंशन या विड्रॉल—कौन सा फैसला आपके लिए सही है? 10 साल का नियम, 2026 के नए बदलाव, पेंशन कैलकुलेशन फॉर्मूला और अर्ली व डेफर्ड पेंशन के फायदे जानिए। एक गलत निर्णय आपकी रिटायरमेंट पूंजी घटा सकता है।
नौकरीपेशा इंसान की ज़िंदगी में रिटायरमेंट का ख्याल अक्सर एक सुकून भी देता है और एक चिंता भी। आपकी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा हर महीने ईपीएफओ (EPFO) में जमा होता है, लेकिन जब बात इस पैसे को निकालने या पेंशन चुनने की आती है, तो अधिकतर लोग उलझ जाते हैं। क्या आपको नौकरी छोड़ते ही सारा पैसा निकाल लेना चाहिए या 58 की उम्र तक पेंशन का इंतज़ार करना चाहिए? 2026 के नए बदलावों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच, यह समझना ज़रूरी है कि आपका एक गलत फैसला आपकी जमा पूंजी को कम कर सकता है।
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पेंशन और विड्रॉल के बीच की लक्ष्मण रेखा: 10 साल का नियम
ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, पेंशन की पात्रता पूरी तरह आपकी 'पेंशन योग्य सेवा' (Pensionable Service) पर निर्भर करती है। अगर आपकी कुल सर्विस 10 साल से कम है, तो आप मंथली पेंशन के हकदार नहीं होते। इस स्थिति में आप फॉर्म 10C के जरिए अपनी पेंशन की राशि एकमुश्त (Lumpsum) निकाल सकते हैं।
लेकिन जैसे ही आपकी नौकरी के 10 साल पूरे हो जाते हैं, आप अनिवार्य रूप से पेंशन के हकदार बन जाते हैं। इसके बाद आप पेंशन फंड से एकमुश्त पैसा नहीं निकाल सकते, बल्कि आपको 58 साल की उम्र के बाद मंथली पेंशन ही मिलेगी।
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2026 के नए बदलाव: बढ़ सकती है सैलरी लिमिट
सरकार 2026 में ईपीएफओ के नियमों में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। वर्तमान में ईपीएफ (EPF) के लिए वेतन की सीमा (Wage Ceiling) ₹15,000 है, जिसे बढ़ाकर ₹21,000 या ₹25,000 किया जा सकता है। इस कदम से निजी क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों के लिए सोशल सिक्योरिटी का दायरा बढ़ेगा और भविष्य में मिलने वाली पेंशन की राशि में भी इजाफा होगा। साथ ही, सरकार न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन मिल सके।
पेंशन की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी सर्विस कितनी लंबी है और आपकी औसत सैलरी क्या थी। 1 सितंबर 2014 के बाद रिटायर होने वालों के लिए पेंशन की गणना पिछले 60 महीनों के औसत वेतन के आधार पर की जाती है।
पेंशन का फॉर्मूला कुछ इस प्रकार है: मासिक पेंशन = (औसत वेतन × सर्विस के वर्ष) / 70
उदाहरण के तौर पर, अगर आपका औसत वेतन ₹15,000 है और आपने 25 साल सेवा की है, तो आपकी पेंशन लगभग ₹5,357 प्रति माह होगी।
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सावधान! समय से पहले पैसा निकालना पड़ सकता है भारी
कई कर्मचारी नौकरी बदलते समय पेंशन का पैसा निकाल लेते हैं, लेकिन यह घाटे का सौदा हो सकता है। अगर आप 10 साल से पहले पैसा निकालते हैं, तो ईपीएफओ एक 'प्रोपोरशन फैक्टर' (Proportion Factor) का इस्तेमाल करता है। इसका मतलब है कि आपको आपके द्वारा जमा किए गए पूरे पैसे के बजाय एक निर्धारित फॉर्मूले के तहत कम राशि मिल सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि नौकरी बदलने पर पैसा निकालने के बजाय 'स्कीम सर्टिफिकेट' (Scheme Certificate) लेना बेहतर है, ताकि आपकी सर्विस के वर्ष जुड़ते रहें और आप अंत में बेहतर पेंशन पा सकें।
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उम्र का खेल: जल्दी पेंशन या ज्यादा पेंशन?
ईपीएफओ आपको अपनी ज़रूरत के हिसाब से पेंशन चुनने की आज़ादी देता है:
नॉर्मल पेंशन: यह 58 साल की उम्र में शुरू होती है.
अर्ली पेंशन (Early Pension): अगर आप 50 साल की उम्र के बाद रिटायर होते हैं, तो पेंशन ले सकते हैं, लेकिन हर साल के लिए आपकी पेंशन 4% कम कर दी जाएगी।
डेफर्ड पेंशन (Deferred Pension): अगर आप 58 के बाद भी पेंशन नहीं लेते और इसे 60 साल तक टाल देते हैं, तो आपकी पेंशन में हर साल 4% से 8% की बढ़ोतरी होती है।
ईपीएफओ केवल पैसा निकालने की स्कीम नहीं है, बल्कि यह आपके और आपके परिवार के भविष्य की सुरक्षा का कवच है। कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में परिवार को मिलने वाली पेंशन इसका सबसे बड़ा फायदा है। इसलिए, अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय केवल आज के विड्रॉल पर नहीं, बल्कि कल की पेंशन पर भी गौर करें। किसी भी बड़े फैसले से पहले आधिकारिक ईपीएफओ पोर्टल या उमंग (UMANG) ऐप पर अपना स्टेटस ज़रूर चेक करें。
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