
मुंबई (महाराष्ट्र) [भारत], 10 जुलाई (एएनआई): जून 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट इनफ्लो तेजी से बढ़ा। इसकी वजह रिटेल निवेशकों की लगातार भागीदारी और लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप कैटेगरी में मजबूत खरीदारी रही।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में नेट इनफ्लो जून में बढ़कर 28,973.41 करोड़ रुपये हो गया, जो मई में 22,907.77 करोड़ रुपये था। यह महीने-दर-महीने लगभग 26.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
डायवर्सिफाइड इक्विटी कैटेगरी में, मिड-कैप फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी सबसे ज्यादा बनी रही। मिड-कैप फंड्स में नेट इनफ्लो जून में बढ़कर 6,090.17 करोड़ रुपये हो गया, जो मई में 4,385.06 करोड़ रुपये था। यह लगभग 38.9 प्रतिशत की वृद्धि है। स्मॉल-कैप फंड्स में भी निवेशकों की मजबूत मांग देखी गई, जहां नेट इनफ्लो इस महीने बढ़कर 5,601.96 करोड़ रुपये हो गया, जबकि मई में यह 4,945.57 करोड़ रुपये था। यह लगभग 13.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। लार्ज-कैप फंड्स में भी निवेश का सेंटिमेंट बेहतर हुआ, जहां नेट इनफ्लो जून में बढ़कर 2,067.48 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले महीने 1,592.93 करोड़ रुपये था। यह लगभग 29.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार में ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद, रिटेल निवेशकों ने सभी मार्केट कैपिटलाइजेशन में पैसा लगाना जारी रखा। हालांकि मिड-कैप फंड्स पसंदीदा बने रहे, लेकिन लार्ज-कैप इनफ्लो में आई तेजी यह भी संकेत देती है कि निवेशकों ने बाजार की अस्थिरता के बीच अपेक्षाकृत स्थिर निवेश के रास्ते भी तलाशे।
जून के दौरान अन्य इक्विटी कैटेगरी में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने 5,231.31 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आकर्षित किया, जो मई के 5,175.54 करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक है। लार्ज और मिड-कैप फंड्स में 4,321.32 करोड़ रुपये आए, जो पिछले महीने के 3,278.22 करोड़ रुपये से अधिक थे, जबकि मल्टी-कैप फंड्स में इनफ्लो 2,291.01 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,070.26 करोड़ रुपये हो गया।
कुल मिलाकर, ग्रोथ/इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड स्कीमों ने जून में 28,973.41 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो जुटाया, जबकि मई में यह 22,907.77 करोड़ रुपये था। यह बाजार की उतार-चढ़ाव वाली स्थितियों के बावजूद रिटेल निवेशकों के बीच निरंतर विश्वास को दर्शाता है। इस कैटेगरी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी जून के अंत में बढ़कर 37.34 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक महीने पहले 36.14 लाख करोड़ रुपये था। यह ताजे इनफ्लो और मार्क-टू-मार्केट गेन दोनों को दिखाता है। (एएनआई)
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