
Gold Mining Companies: सोने की कीमतों में जारी तेजी का फायदा सिर्फ निवेशकों को ही नहीं, बल्कि दुनिया की गोल्ड माइनिंग कंपनियों को भी जमकर मिल रहा है। 2026 की पहली तिमाही में इन कंपनियों की कमाई और मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई और दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कंपनियों का मार्जिन और फ्री कैश फ्लो मजबूत रहा।
रिकॉर्ड कमाई के बीच गोल्ड माइनिंग कंपनियों के लिए लागत भी लगातार बढ़ रही है। WGC के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में सोने की All-In Sustaining Costs (AISC) सालाना आधार पर 16% और पिछली तिमाही के मुकाबले 5% बढ़कर 1,785 डॉलर प्रति औंस हो गई।
यह लगातार 28वीं तिमाही है जब सोना निकालने की लागत में साल-दर-साल बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यानी सोने की कीमत भले ही तेजी से बढ़ रही हो, लेकिन कंपनियों के लिए उसे जमीन से निकालने का खर्च भी कम नहीं हो रहा।
सोने की माइनिंग लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में रॉयल्टी पेमेंट में हुई तेज बढ़ोतरी शामिल है। जनवरी में सोने की कीमत कुछ समय के लिए 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।
कीमत बढ़ने के साथ कंपनियों की बिक्री और कमाई बढ़ी, लेकिन सरकारों को दी जाने वाली रॉयल्टी भी बढ़ गई। WGC के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में रॉयल्टी खर्च पिछली तिमाही से 24% और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 85% ज्यादा रहा।
2021 की पहली तिमाही में रॉयल्टी कुल माइनिंग लागत का करीब 6% थी। अब 2026 की पहली तिमाही में इसका हिस्सा बढ़कर 12% हो गया है।
पश्चिम अफ्रीका में बदले टैक्स नियम और ‘रिसोर्स नेशनलिज्म’ ने भी गोल्ड माइनिंग कंपनियों की लागत बढ़ाई है। इसका मतलब है कि कई देश अपने प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली कमाई में सरकार का हिस्सा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
घाना ने मार्च में नया रॉयल्टी सिस्टम लागू किया। इसके तहत सोने की कीमत 4,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने पर 12% तक रॉयल्टी देनी पड़ सकती है।
बुर्किना फासो में 2025 में लागू किए गए सिस्टम के तहत 4,000 से 4,500 डॉलर प्रति औंस के बीच सोने की कीमत होने पर 10% रॉयल्टी लगती है। वहीं माली ने 2024 में 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर 9.5% की ऊंची रॉयल्टी दर लागू की थी।
बढ़ी हुई रॉयल्टी का असर कंपनियों की लागत पर साफ नजर आ रहा है। WGC के मुताबिक, बुर्किना फासो स्थित IAMGOLD की Essakane खदान में रॉयल्टी खर्च पिछले साल के मुकाबले 220% बढ़ गया। अब यह कंपनी की कैश कॉस्ट का करीब 35% हिस्सा है।
Resolute Mining ने भी माना है कि उसकी Syama खदान में लागत बढ़ने की प्रमुख वजहों में रॉयल्टी शामिल है।
दिलचस्प बात यह है कि लागत बढ़ने के बावजूद गोल्ड माइनिंग कंपनियों का मार्जिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह सोने की औसत कीमतों में आई तेज उछाल है।
रिपोर्ट के अनुसार, सोने की औसत कीमत पिछली तिमाही के मुकाबले 17% और सालाना आधार पर 70% बढ़ी। इसके चलते कंपनियों का औसत AISC मार्जिन पिछली तिमाही से 25% और पिछले साल की समान तिमाही से 134% बढ़कर 3,076 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
रिकॉर्ड कमाई का फायदा कंपनियां अपने शेयरधारकों के साथ भी साझा कर रही हैं। डिविडेंड और शेयर बायबैक के जरिए निवेशकों को पैसा लौटाया जा रहा है।
WGC की रिपोर्ट के मुताबिक, Newmont ने रिकॉर्ड 3.1 अरब डॉलर का फ्री कैश फ्लो जेनरेट करने के बाद शेयरधारकों को 2.7 अरब डॉलर लौटाए। इसके अलावा कंपनी ने 6 अरब डॉलर के अतिरिक्त शेयर बायबैक प्रोग्राम को भी मंजूरी दी।
वहीं, AngloGold Ashanti ने 1.2 अरब डॉलर का रिकॉर्ड फ्री कैश फ्लो दर्ज किया। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अब कर्ज की स्थिति से निकलकर नेट कैश वाली स्थिति में पहुंच गई है।
ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर डाला है। ऊर्जा, माल ढुलाई और दूसरी जरूरी सेवाओं की लागत बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में थोक डीजल की कीमत 54% और पर्थ में 96% तक बढ़ी।
हालांकि, बड़ी गोल्ड माइनिंग कंपनियों पर इसका तत्काल असर सीमित रहा। इसकी वजह यह है कि कई कंपनियों ने हेजिंग, इन्वेंट्री और लंबी अवधि के खरीद समझौतों के जरिए बढ़ती लागत के जोखिम को कम किया हुआ था।
WGC का अनुमान है कि माइनिंग कंपनियों की लागत आगे भी बढ़ सकती है। ईरान संघर्ष और उससे जुड़ी सप्लाई चेन की परेशानियों का पूरा असर 2026 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों में ज्यादा साफ दिखाई दे सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहली तिमाही के अंत में लागत में हुई कई बढ़ोतरी का असर दूसरी तिमाही में ईंधन, माल ढुलाई और अन्य खर्चों पर दिखाई देगा। इससे कंपनियों के रिकॉर्ड मार्जिन पर आगे दबाव आने की संभावना है।
फिलहाल, सोने की ऊंची कीमतें माइनिंग कंपनियों को मजबूत कमाई दे रही हैं। लेकिन बढ़ती रॉयल्टी, ईंधन खर्च और सप्लाई चेन की चुनौतियां आने वाली तिमाहियों में इस कमाई की तस्वीर बदल सकती हैं।
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